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बिना अनुमति नॉर्थ पोर्टल से रोहतांग टनल में घुस गए कई लोग

Tue, 20 Nov 2018 12:27 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केलांग/कोकसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, केलांग/कोकसर Updated Tue, 20 Nov 2018 12:27 PM IST
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Many people entered Rohtang tunnel from North Portal without permission
प्रतीकात्मक तस्वीर

दिन भर माइनस तापमान में इंतजार करने के बाद देर शाम मनाली जाने वाले लाहौलवासियों का गुस्सा रोहतांग टनल के नॉर्थ पोर्टल पर फूटा। नॉर्थ पोर्टल में बिना अनुमति के ही बच्चों बच्चों समेत दर्जन महिलाएं व पुरुष टनल में घुस गए।

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उक्त लोग काफी समय से मनाली जाना चाहते थे। इनमें मरीज परीक्षार्थी व अन्य लोग शामिल हैं। सूचना मिलने पर केलांग पुलिस मौके के लिए रवाना हुई।  लोग सुबह से रोहतांग टनल के नार्थ पोर्टल में मनाली आने को बीआरओ से आग्रह कर रहे थे।
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लेकिन जरूरी होने पर कुछ ग्रामीण करीब पौने 9 बजे औपचारिकताएं पूरी किए बगौर ही टनल में जा घुसे। ये ग्रामीण पिछले दो दिनों से कुल्लू और मनाली जाने के लिए नॉर्थ पोर्टल पहुंच रहे थे।
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सूचना फैलने के बाद प्रशासन, पुलिस और बीआरओ में हड़कंप मच गया। डीएसपी केलांग हरीश ने बताया कि रोहतांग टनल के नॉर्थ पोर्टल से कुछ ग्रामीण बिना अनुमति घुसने की सूचना मिली है। पुलिस मौके के लिए रवाना हो गई है। 

चंदे के पैसों से लोग खुद बहाल करेंगे अब रोहतांग दर्रा

Many people entered Rohtang tunnel from North Portal without permission

 बीआरओ के इंकार के बाद अब लाहौल के लोग मजबूरन खुद रोहतांग दर्रे को बर्फ हटाकर बहाल करने की तैयारी में हैं। 13050 फीट ऊंचे रोहतांग दर्रे पर सड़क बर्फ की मोटी चादर के नीचे दबी पड़ी है। लोगों ने बाकायदा डोनेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

रविवार को लाहौल बीडीसी के प्रथम अध्यक्ष रहे चरण दास भट्ट ने 10 हजार रुपये दान कर डोनेशन की प्रक्रिया शुरू की। इसी तरह से धन जुटाकर लाहौल की जनता रोहतांग दर्रे से बर्फ हटाने के लिए निजी कंपनियों से डोजर और अन्य मशीनरी किराये पर लेगी।  

बीआरओ की तरफ से रोहतांग दर्रा बहाल नहीं करने की घोषणा के बाद लाहौल के लोगों ने यह फैसला किया है। इसकी जानकारी जिला प्रशासन को दे दी गई है। बताया जा रहा है कि अचानक हुई बर्फबारी के बाद कुल्लू-मनाली में लाहौल के सैकड़ों लोगों के साथ सरकारी कर्मचारी भी फंस गए हैं।

बकि निर्माणाधीन रोहतांग टनल से होकर आवाजाही बेहद मुश्किल है। टनल होकर आवाजाही की प्रक्रिया कठिन और थकाऊ होने के कारण लोग रोहतांग बहाल करने की लगातार मांग कर रहे हैं लेकिन, बीआरओ फिलहाल बर्फ हटाने को तैयार नहीं है।

रविवार को बैठक कर लोगों ने चंदा जुटाकर खुद अपने स्तर पर रोहतांग बहाल करने का निर्णय लिया है। तांदी, मूलिंग समेत कई पंचायतों ने चंदा देने की घोषणा की है। चरणदास भट्ट ने कहा कि 15 नवंबर से रोहतांग दर्रा बंद करने की अधिसूचना दशकों पुरानी है। तब शायद बीआरओ का बजट भी सीमित होगा।

लोगों की जरूरतें भी कम थीं। रोहतांग में महज 1 से 2 फुट बर्फ है। मजबूरन लोगों को बर्फ हटाने के लिए चंदा जुटाना पड़ रहा है। उधर, टैक्सी यूनियन लाहौल के समन्वयक जवाहर ने कहा कि अगर बीआरओ चाहे तो दो-दिनों में रोहतांग खुल सकता है। अब तमाम टैक्सी चालक भी जनता के साथ मिलकर चंदा जुटा रहे हैं।  

बीआरओ की अनुमति बिना संभव नहीं दर्रा खोलना 
बताया जा रहा है कि चंदा जुटाने के बावजूद बीआरओ की मंजूरी के बिना रोहतांग बहाल करना संभव नहीं है। एसडीएम केलांग अमर नेगी ने कहा कि जनता की मुहिम को लेकर जिप अध्यक्ष रमेश का उन्हें फोन आया था। इसके लिए बीआरओ से अनुमति लेनी होगी। जिला प्रशासन इसको लेकर बीआरओ को सूचित करेगा। 

घर वापसी को सोलंगनाला में 250 लोगों ने डाला डेरा      

Many people entered Rohtang tunnel from North Portal without permission

कड़ाके की ठंड के बीच पिछले दो दिनों से लाहौल जाने के लिए रोहतांग टनल के बैरियर पर सोलंगनाला में 250 लाहौलवासियों ने डेरा डाला हुआ है। लेकिन आवाजाही की सुविधा न मिलने से शाम को निराश होकर वापस मनाली आने को मजबूर हैं।

लाहौलवासी इसी आस में बैठे है कि कब बैरियर खुलेगा और उन्हें रोहतांग टनल से लाहौल अपने घर पहुंचने का मौका मिलेगा। महिलाएं अपने बच्चों के साथ सुबह आठ बजे से भूखे प्यासे कड़ाके की ठंड में बैरियर के पास बैठ जाती हैं।

लाहौल निवासी पदमा छेरिंग, आंग्मों, टशी, सोनम, अमर, अंगदुई, तारा चंद ने बताया कि सर्दियों के लिए आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, खाद्य सामग्री व गर्म कपड़े लेने के लिए मनाली आए थे। इस बीच भारी बर्फबारी से रोहतांग बंद हो गया है और करीब 250 लोग फंस गए हैं।

अब न तो रोहतांग दर्रा बहाल हो रहा है और न ही टनल से लाहौल जाने दिया जा रहा है। शासन व प्रशासन भी उनकी गुहार नहीं सुन रहा है। हेलीकॉप्टर उड़ान भी नहीं हो रही है। ऐसे में उन्हें जाने के लिए कोई रास्ता नहीं दिख रहा है। दिनभर भूखे प्यासे इंतजार के बाद घर जाने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

बताया कि शासन व प्रशासन से बातचीत के बावजूद घर पहुंचने का कोई माध्यम नहीं दिख रहा है। रोजाना हो रहे खर्चे से उनके पास पैसा भी कम ही बचा है। उन्होंने शासन व प्रशासन से मांग की है कि लाहौल भेजने के लिए व्यवस्था की जाए।

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