बिना आधार अब नहीं मिलेगा रोजगार
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मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों के लिए एक अप्रैल से आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। अब मनरेगा में काम करने से पहले आधार कार्ड पंजीकरण करवाना होगा।
एक अप्रैल से केंद्र सरकार देश के 300 जिलों में मनरेगा को डीबीटी योजना से जोड़ने जा रही है जिसमें प्रदेश के सभी जिले शामिल हैं। केंद्र सरकार ने 18 फरवरी को प्रदेश सरकार को सूचित कर दिया है।
केंद्र सरकार ने इस कार्यक्रम की निगरानी की जिम्मेदारी जिलों के उपायुक्तों को सौंपी है। मनरेगा में काम करने वाले जिस मजदूर ने आधार के लिए पंजीकरण नहीं किया है, उसका पंजीकरण करवाने का उत्तरदायित्व खंड विकास अधिकारी को दिया गया है ताकि इस योजना को सफल बनाया जा सके।
43 प्रतिशत मजदूरों का नहीं हुआ पंजीकरण
प्रदेश में मनरेगा के तहत 2247512 लोगों का पंजीकरण किया गया है जिसमें 1281755 लोगों के आधार ही एमआईएस में अपलोड हैं जबकि 965757 लोगों के आधार अभी एमआईएस में नहीं चढ़े हैं।
अभी तक प्रदेश में केवल 57 प्रतिशत मजदूरों के आधार कार्ड ही मनरेगा सॉफ्टवेयर में अपलोड हैं जबकि 43 प्रतिशत मजदूरों के आधार कार्ड अपलोड होने बाकी हैं।
महीने में अपलोड होंगे 15% आधार
दो सालों से मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों में से 85 प्रतिशत मजदूरों के आधार बन चुके हैं और उन्हें एमआईएस में अपलोड भी कर दिया गया है। बचे हुए 15 प्रतिशत मजदूरों के आधार कार्ड एक माह में अपलोड करने होंगे। जिन मजदूरों ने अभी तक पंजीकरण नहीं करवाया है, उनका पंजीकरण शीघ्र करवाना होगा।
मनरेगा सॉफ्टवेयर में होगी एंट्री
खंड विकास अधिकारी सोलन विजय कुमार शर्मा ने बताया कि मनरेगा के तहत दो सालों से काम करने वाले मजदूरों में से अधिकतर की आधार कार्ड एंट्री मनरेगा सॉफ्टवेयर में कर दी गई है।
जिन मजदूरों ने आधार कार्ड के लिए पंजीकरण नहीं करवाया है, उनका शीघ्र ही पंजीकरण करवाया जाएगा ताकि वे भी मनरेगा का लाभ उठा सकें।
2247512 मजदूरों का नहीं हुआ पंजीकरण
हिमाचल प्रदेश में 2247512 मजदूरों का पंजीकरण अभी भी नहीं हो पाया है। बिलासपुर 5619, चंबा 18288, हमीरपुर 3618, कांगड़ा 23241, किन्नौर 9351, कुल्लू 10287, लाहौल 6674, मंडी 3516, शिमला 24323, सिरमौर 16701, ऊना 1240 और सोलन जिला में 4658 मजदूरों के पंजीकरण कार्ड नहीं बने हैं।