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अस्पताल प्रशासन ने की देरी, तड़प-तड़प कर उखड़ गईं नवजात की सांसें

Sat, 16 Dec 2017 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी
ब्यूरो/अमर उजाला, मंडी Updated Sat, 16 Dec 2017 01:57 PM IST
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mandi zonal hospital newborn died due to negligence

आखिर वही हुआ, जिसका डर था। स्वास्थ्य विभाग की देरी ने एक नवजात की जान ले ली। रात दो बजे जन्मी नवजात बच्ची की तड़पते-बिलखते सांसें उखड़ गईं। प्रसव के 36 घंटों बाद तक जच्चा-बच्चा को अस्पताल के ठंडे फर्श पर बिछे मैट के सहारे छोड़ दिया गया। तीमारदार बेड तलाशते रहे लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने मदद की जरूरत नहीं समझी।

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इसी बीच सुबह 11:00 बजे नवजात ने दम तोड़ दिया। मामला हिमाचल के जोनल अस्पताल मंडी का है। नवजात की मौत के बाद भी दोपहर ढाई बजे तक करीब 15 गर्भवती महिलाएं और प्रसूता नवजात बच्चों के साथ ठंडे फर्श पर तड़पती रहीं। अस्पताल के आला अधिकारी जिला प्रशासन के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग में व्यस्त रहे।
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बच्ची की मौत से आहत परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अभी तो अपनी बच्ची का नाम तक नहीं सोचा था और वह दुनिया से चली गई। नवजात बच्ची के पिता विपिन और मां दिशा का रो-रो कर बुरा हाल है। चनौण पंचायत के सलेरा गांव के दंपती के छह वर्षीय बेटे से भी बहन का साथ छूट गया है।

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स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप

mandi zonal hospital newborn died due to negligence

प्रदेश के नंबर वन अखबार अमर उजाला में खबर छपने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। खबर पर संज्ञान लेते हुए निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं बलदेव कुमार ने मंडी अस्पताल प्रबंधन से जवाब तलब कर लिया। अस्पताल में अतिरिक्त 20 बेडों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही हर दिन गायनी वार्ड में व्यवस्था की रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। निदेशक ने बताया कि मरीजों की संख्या सुंदरनगर और कुल्लू में गायनी विशेषज्ञ न होने के कारण बढ़ी है।

गायनी वार्ड में 135 मरीज हैं और बेड महज 40 हैं। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। उधर, स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि जोनल अस्पताल प्रबंधन से बात की जाएगी। आचार संहिता के कारण वह मामले में अधिक हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं। 

नवजात की मौत से टूट गई मां

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नवजात की मौत से मां दिशा टूट सी गई हैं। दिशा ने रोते हुए कहा कि गायनी वार्ड में उनके साथ पशुओं जैसा बर्ताव हुआ। अस्पताल में एक जिंदगी को जन्म देने की आस में आई थी, लेकिन लचर प्रबंधन ने मुझे उम्र भर का दर्द दे दिया। दिशा ने बताया कि वीरवार रात करीब 11:00 बजे सास लीला देवी ड्यूटी रूम में नर्सों के पास गईं।

नर्सों ने कहा कि बच्चे ऐसे ही रोते हैं - जाओ मां को बोलो, दूध पिलाओ। सास लौटी तो मैंने बच्ची को दूध पिलाया। लेकिन, बच्ची रोती रही। एक बार फिर सास नर्सों के पास गईं। लेकिन, उन्हें लौटा दिया गया। सुबह तक बच्ची सिसकती रही।  शुक्रवार सुबह 10 बजे डॉक्टर को दिखाया तो कहा कि बच्ची ठीक है।

कहा, पिछले कल इंजेक्शन लगे हैं - तब रो रही है। वापस गैलरी में आकर बच्चे के साथ फर्श पर लेट गई। लेकिन, आधे घंटे बाद बच्ची की सिसकियां शांत हो गईं। डॉक्टर को दिखाया तो कहा कि बच्ची के फेफड़ों में दूध जम गया है। पीलिया लग रहा है, जिस कारण मौत हुई है।

डिस्चार्ज स्लिप तक नहीं दी

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परिजनों का दावा किया है कि मांगने के बावजूद नर्सों ने डिस्चार्ज स्लिप तक नहीं दी। बेटी की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन को जिम्मेवार ठहराया है। बुधवार सुबह अस्पताल में एडमिट हुई और मुझे कोई बेड नहीं मिला।

बुधवार रात को मैंने बच्ची को जन्म दिया। उम्मीद थी कि अब प्रसव के बाद बेड मिल जाएगा। लेकिन, फिर ठंडे फर्श पर ही लेटना पड़ा।

आखिर मैंने अपनी बेटी को खो दिया। मेरी नजरों के सामने बच्ची की चीखें सिसकियों में बदल गईं। जिसे नौ महीने तक पेट में पाला व एक दिन में दुनिया से चली गई।

जागा स्वास्थ्य विभाग

mandi zonal hospital newborn died due to negligence

प्रदेश स्वास्थ्य विभाग ने जोनल अस्पताल मंडी प्रबंधन को गायनी वार्ड में बैडों की अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही अस्पताल प्रबंधन से हर दिन गायनी वार्ड में व्यवस्था की रिपोर्ट मांगी है। प्रदेश के नंबर वन अखबार अमर उजाला में छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए निदेशक स्वास्थ्य सेवा ने यह निर्देश अस्पताल प्रबंधन को दिए हैं।

निर्देशों के बाद प्रबंधन हरकत में आया और 20 बैडों की अतिरिक्त व्यवस्था की है, लेकिन हालात नहीं सुधरे हैं। वर्तमान में गायनी वार्ड में 135 मरीज और 40 बैडों की व्यवस्था है। अस्पताल के अन्य वार्डो में अतिरिक्त 20 बैडों की व्यवस्था भी गई। बावजूद इसके गायनी वार्ड की गैलरी में प्रसूता और गर्भवती महिलाएं शुक्रवार को ठंडे फर्श पर लेटने को विवश रही।

निर्देश जारी किए
निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं बलदेव कुमार ने कहा कि मामले अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा गया है। तत्काल 20 बैडों की अस्पताल में अतिरिक्त व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। मरीजों की संख्या सुंदरनगर और कुल्लू में गायनी विशेषज्ञ न होने के कारण बढ़ी है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा। इसके लिए विभाग प्रयासरत है।

प्रबंधन से करेंगे बात
स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा मामले के बारे में जोनल अस्पताल प्रबंधन इस बारे में बात की जाएगी। आचारसंहिता के कारण वह मामले में अधिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। बावजूद इसके अपने स्तर  पर प्रबंधन से जरूर बात करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने जच्चा और बच्चा की सुरक्षा के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। इस तरह की व्यवस्था प्रबंधन की लापरवाही है।

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