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मंडी, शिमला और कांगड़ा में हावी रही राजशाही

Sat, 22 Mar 2014 06:50 PM IST
Updated Sat, 22 Mar 2014 06:50 PM IST
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Mandi, Shimla and Kangra dominated monarchy
हिमाचल में सत्ता की चाबी अमूमन राजघरानों के पास ही रही है। मंडी, शिमला और कांगड़ा संसदीय सीटों पर जीत दर्ज कर राजघरानों के सदस्य लोकसभा की दहलीज कई बार पार कर चुके हैं।
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हालांकि, हमीरपुर में यह मिथक कभी नहीं बन पाया। राज्य में हमीरपुर एकमात्र सीट है, जहां से राजघराने का कोई भी सदस्य चुनावी रण में नहीं कूदा। 

मंडी महासू सीट से 1952 में जीतकर फरीदकोट की राजकुमारी अमृत कौर संसद में पहुंची थीं।

वे इंडियन नेशनल कांग्रेस की उम्मीदवार थीं। मंडी संसदीय क्षेत्र से सेन वंश के ललित सेन दो बार और जोगिंद्र सेन एक बार लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं।

वीरभद्र सिंह चार बार जीत चुके हैं लोकसभा चुनाव

Mandi, Shimla and Kangra dominated monarchy
मंडी से वीरभद्र सिंह और उनकी धर्मपत्नी भी सांसद बने हैं। वीरभद्र सिंह चार बार चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे हैं। 1962 में महासू से, 1972, 1980 और 2009 में मंडी सीट से जीते हैं।

वहीं, भाजपा छोड़ चुके महेश्वर सिंह भी मंडी से तीन बार सांसद रहे हैं।

राजघराने से संबंधित एवं वीरभद्र सिंह की धर्मपत्नी प्रतिभा भी 2004 और वर्तमान में सांसद हैं।

महेश्वर, वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह तीनों राजपरिवार से हैं। कांगड़ा से राजघराने से संबंध चंद्रेश कुमारी 1984 और कंवर दुर्गा चंद 1977 में चुनाव जीतकर संसद की दहलीज पार कर चुके हैं।
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