इस बात पर फूटा अभिभावकों का गुस्सा, स्कूल नहीं भेजे बच्चे
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हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा का स्तर सुधारने को जहां नए-नए प्रयोग कर रही है, वहीं शिक्षकों की कमी से आहत अभिभावक बच्चों को स्कूल न भेजकर रोष जता रहे हैं।
करसोग खंड-1 की राजकीय प्राथमिक पाठशाला तुंदल और नांज में सालों से चली रही अध्यापकों की कमी के चलते सोमवार को अभिभावकों के सब्र का बांध टूट गया और उन्होंने अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
उन्होंने शिक्षा विभाग तथा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े किए और कहा कि अब हम अपने बच्चों का भविष्य अंधकार में नहीं डाल सकते हैं।
अभिभावकों में उर्मिला देवी, कुंदन लाल, राजेश्वरी, रीमा देवी और किरण आदि का कहना है कि नांज स्कूल में 3 अध्यापकों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन कई वर्षों से एक ही अध्यापक पढ़ा रहा है।
एक पद खाली चल रहा है, जबकि एक अध्यापक डेपुटेशन पर रहता है। उधर, तुंदल स्कूल में दो अध्यापक हैं। इनमें एक हमेशा डेपुटेशन पर भेजा जाता है, जिससे शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्रों की पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है और पढ़ाई बाधित हो रही है।
मसले पर कोई नहीं दिखा रहा गंभीरता
अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों और स्थानीय नेताओं से बच्चों के भविष्य को लेकर गुहार लगाई, लेकिन कोई भी इस बात को गंभीरता से नहीं ले रहा है।
कुछ दिन पहले ग्रामीणों के बच्चों को स्कूल न भेजने पर करसोग प्रशासन व शिक्षा विभाग के अधिकारी को अवगत करवाया था।
उन्होंने कहा कि खिचड़ी, वर्दी, किताबों को मुफ्त देने से शिक्षा नहीं मिलेगी। इसके लिए स्कूलों में योग्य अध्यापक तैनात करने होंगे। उन्होंने विभाग व सरकार को चेताया कि जब तक रिक्त पदों को नहीं भरा गया इन स्कूलों का पूरी तरह से बहिष्कार किया जाएगा।
शिक्षकों को डेपुटेशन पर भेजना मजबूरी
बीईईओ करसोग केशव राम ने बताया कि सोमवार को कोई भी विद्यार्थी नांज और तुंदल स्कूल में शिक्षा ग्रहण करने नहीं आया, जबकि स्टाफ स्कूल में ही था।
इन स्कूलों के अध्यापकों को डेपुटेशन पर भेजना मजबूरी है, क्योंकि पुराने स्कूल में कोई भी अध्यापक नहीं है। रिक्त पदों का मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। सोमवार को बच्चे स्कूल न आने की सूचना भी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है।