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प्रिंसिपल की नौकरी छोड़कर गोसेवा को बना लिया करियर

Mon, 12 Mar 2018 12:46 PM IST
श्याम सुदंर, अमर उजाला, राजा का तालाब (कांगड़ा)
श्याम सुदंर, अमर उजाला, राजा का तालाब (कांगड़ा) Updated Mon, 12 Mar 2018 12:46 PM IST
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Man who leave principal job for serving cows

आज हम आपके लिए एक ऐसे शख्स की कहानी लेकर आए हैं जिसने प्रिंसिपल की नौकरी छोड़कर गोसेवा को करियर बना लिया।

Man who leave principal job for serving cows

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर उपमंडल के गनोह गांव के ऋषि डोगरा ने जयराम सरकार के बजट से पहले से ही गाय पालन को रोजगार के साथ जोड़कर काम शुरू कर दिया है। ऋषि डोगरा ने एक निजी स्कूल की प्रधानाचार्य की नौकरी छोड़कर गाय पालन का काम एक साल से शुरू किया है। उन्होंने कामधेनु स्वदेशी गोशाला खोली है।

Man who leave principal job for serving cows

उनकी गोशाला में साहीवाल नस्ल की 25 गायें हैं। एमबीए करने के बाद ऋषि डोगरा ने विभिन्न कंपनी में नौकरी की। उसके बाद निजी स्कूल में बतौर प्रधानाचार्य सेवाएं दीं, लेकिन मन ऊब जाने के बाद गाय पालन का काम शुरू किया है। पिछले एक साल में ही 25 साहीवाल गाय को पालकर दूध, घी, गोमूत्र अर्क और गोमूत्र से तैयार बिना केमिकल के फर्श क्लीनर से अपनी आजीविका कमाना शुरू कर दी है। ऋषि डोगरा ने कहा कि ऐसा करने की सोच मन में तब उत्पन्न हुई, जब उन्होंने गाय का निरादर होता देखा। उन्होंने सोचा क्यों न गोसेवा की जाए। इससे उनकी आय के साधन भी बनेंगे।

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डेढ़ सौ लीटर गोमूत्र अर्क कर रहे तैयार- एक साल में ही ऋषि डोगरा गाय पालन से रोजाना 40 किलो दूध, महीने में दस किलो घी, एक हजार लीटर फर्श क्लीनर, डेढ़ सौ लीटर गोमूत्र अर्क तैयार कर रहे हैं। इस कार्य में हाथ बंटाने के लिए दिल्ली निवासी उनके बड़े भाई राजेश डोगरा और जीजा दीपक सहयोग कर रहे हैं।

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गोबर निर्मित धूप, अगरबत्ती बनाना लक्ष्य- ऋषि का अगला लक्ष्य गोबर निर्मित धूप और बिना लकड़ी के अगरबत्ती तथा गोबर निर्मित काष्ठ निर्मित करना है, ताकि लकड़ी का प्रयोग विभिन्न कार्यों में कम हो सके। उनका कहना है कि इससे न केवल पेड़ों को बचाने में कुछ मदद मिलेगी। उनकी गोशाला प्रांगण में बनाए कृष्ण मंदिर में ऋषि सुबह चार बजे से मंत्रोच्चारण से अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं।

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