बागवानी प्रोजेक्ट में अफसरों की जवाबदेही होगी : महेंद्र
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बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने कहा कि 1134 करोड़ के विश्व बैंक वित्त पोषित बागवानी प्रोजेक्ट के तहत सेब के पौधों में देरी से आयात पर अफसरों की जवाबदेही तय होगी। विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री की अनुमति के बिना इटली से 3 लाख 76 हजार 500 सेब के पौधे मंगवाए।
पूर्व सरकार के समय साल 2016 और 2017 में सरकार की अनुमति से पौधों का आयात किया गया। सेब के पौधे लगाने का समय दिसंबर से मार्च के बीच होता है, लेकिन ये पौधे मई में हिमाचल पहुंचे। 20 से 25 हजार पौधे बद्दी कोल्ड स्टोर में पड़े हैं।
इन्हें रोपा नहीं जा सका है और ये पौधे भी सूख सकते हैं। बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर ने इस मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। इसके लिए संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट की राशि का सदुपयोग होना चाहिए और इसका लाभ बागवानों को मिलना चाहिए।
यहां जानिए क्या है पूरा मामला
इस प्रोजेक्ट के तहत पूर्व कांग्रेस सरकार के समय में वर्ष 2016 और 2017 में इटली से सेब के पौधे तत्कालीन मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री की अनुमति के बाद खरीदे गए, लेकिन जयराम सरकार के गठन के बाद अधिकारी ने मुख्यमंत्री और बागवानी मंत्री की अनुमति लेना जरूरी नहीं समझा।
अनुमति के बिना इटली से सेब के 3 लाख 76 हजार 500 पौधों को आयात किया गया। इटली से मंगवाए गए इन पौधों को नौणी, बाथल, गोड़ा, बजौरा आदि स्थानों पर रखा गया है। हैरानी की बात यह है कि गत तीन माह से आयात करने के बाद 20 से 25 हजार पौधे बद्दी कोल्ड स्टोर में पड़े हैं।
इन्हें अभी तक कहीं पर रोपा नहीं किया है। इससे इन पौधों के सूखने की भी आशंका है। प्रोजेक्ट में कंसल्टेंसी पर 91 करोड़ 86 लाख रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है।
बागवानी विभाग के पास प्रदेश में प्रजनन उद्यान हैं। प्रजनन उद्यानों की सैकड़ों बीघा भूमि बेकार पड़ी है। विभाग अब अपनी भूमि पर सेब के रूट स्टॉक तैयार करेगा, ताकि भविष्य में इसे विदेशों से न मंगवाना पड़े।