युकां लाठीचार्ज मामलाः मजिस्ट्रियल जांच के आदेश तो दिए, लेकिन करेगा कौन
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युकां कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज मामले में सरकार की ओर से सदन में दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश में नया पेच फंस गया है। अब यह जांच किस अधिकारी को सौंपी जाएगी, इस पर संशय बन गया है।
घटना के समय उपायुक्त, एडीएम (कानून व्यवस्था) और एसडीएम (शहरी) मौके पर मौजूद थे। पुलिस प्रशासन ने मौके पर इनसे हस्तलिखित मंजूरी लेने के बाद ही बल प्रयोग किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
दो अधिकारियों को तत्काल पद से हटाने की मांग भी कर डाली। इस स्थिति में अगर इन्हीं में से किसी अफसर को मजिस्ट्रियल जांच सौंपी गई तो एक बार फिर से बवाल होने का पूरा अंदेशा है। नियमों के मुताबिक केवल उपायुक्त, एडीएम और एसडीएम ही मजिस्ट्रियल जांच कर सकते हैं।
अब जब लाठीचार्ज ही इन्हीं अधिकारियों के आदेश पर किया गया तो फिर इन्हें ही मजिस्ट्रियल जांच का जिम्मा कैसे सौंपा जा सकता है। अब राज्य सरकार इसका तोड़ निकालने में जुटी है।
विधानसभा में गूंजा मामला, दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक
हिमाचल विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज किया, जिस वजह से उनके कई कार्यकर्ताओं को गंभीर चोटें आईं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वह शांतिपूर्वक तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे और अपनी गिरफ्तारियां देने को तैयार थे, लेकिन पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने के बजाय उन पर लाठियां भांजीं। सोमवार को विधानसभा में यह मामला गूंजा और दोनों पक्षों में तीखी नोक-झोंक हुई।
विपक्ष के सदस्य नारेबाजी करते हुए वेल में चले गए और चेयर का घेराव किया और स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 20 मिनट तक स्थगित कर दी। इसके बाद मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मजिस्ट्रियल जांच की घोषणा कर दी। अब देखना दिलचस्प होगा कि जांच अफसर किसको नियुक्त किया जाता है।