सत्ता संग्राम 2019: चार दिन पहले कांग्रेस में आए आश्रय की जीत का दारोमदार दादा सुखराम पर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विधानसभा चुनावों में मंडी से मुंह की खाने वाली कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में सुखराम के प्रभाव को भुनाने के लिए आश्रय पर दांव खेला है। मंडी में सुखराम परिवार के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए हाथ से फिसली मंडी सीट को दोबारा कब्जाने की कूटनीतिक चाल कांग्रेस ने चल तो दी है लेकिन यहां सीएम का चेहरा कांग्रेस की जीत में सबसे बड़ा रोड़ा बनेगा। 17 में से 14 भाजपा समर्थित विधायक भी कांग्रेस के लिए चुनौती बनेंगे।
दूसरी ओर चेहरों में बंटी कांग्रेस में प्रचार के दौरान तालमेल बिठाना युवा उम्मीदवार आश्रय के लिए मुश्किल होगा। भितरघात का खतरा अलग से रहेगा। हालांकि मंडी में सुखराम की पकड़ कुछ राहत जरूर दे सकती है। वीरभद्र का मंडी में चुनावी प्रचार निर्णायक सिद्ध हो सकता है। दिल्ली में सुखराम और वीरभद्र भले ही गले मिले हों लेकिन, उनके दिल मिले हैं या नहीं इसे लेकर संशय बरकरार है।
राजघरानों से नहीं अब दो पंडितों में होगा मुकाबला
पहली बार मंडी में राजघरानों से मुकाबला नहीं होगा। यहां अब दो पंडितों के बीच मुकाबला होगा। आश्रय शर्मा और रामस्वरूप शर्मा के बीच तीस फीसदी के करीब ब्राह्मण बिरादरी का वोट भी विभाजित होगा। इसमें कांग्रेस का वोट भी काफी अहम रहेगा।
लंदन से पढ़े आश्रय को बॉलीवुड का भी साथ
लंदन में पढ़े 32 वर्षीय युवा आश्रय शर्मा को बॉलीवुड कनेक्शन का भी सहारा रहेगा। उनके छोटे भाई आयुष शर्मा अभिनेता हैं और उनकी फैन फॉलोइंग काफी अच्छी है। वहीं, सलमान खान का भी आश्रय को सहयोग मिल सकता है, क्योंकि सलमान आयुष के बहनोई हैं। हालांकि सलमान किसी भी पार्टी के लिए चुनाव प्रचार न करने की बात कह चुके हैं।
मंडी संसदीय क्षेत्र के कई नेता सुखराम के चेले
मंडी संसदीय क्षेत्र में कई कांग्रेस और भाजपा नेता सुखराम के शिष्य हैं। यहां तक कि शिमला से कांग्रेस के संसदीय सीट के प्रत्याशी धनी राम शांडिल भी अपना पहला चुनाव सुखराम के नेतृत्व में लड़े हैं। भाजपा सरकार में मंत्री महेंद्र सिंह, डॉ. राम लाल मारकंडा और कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रकाश चौधरी, भाजपा विधायक जवाहर ठाकुर भी हिमाचल विकास कांग्रेस से लड़े हैं।
मडी संसदीय क्षेत्र: 1952 से अब तक 17 विधानसभा क्षेत्रों वाले मंडी ससंदीय क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा रहा है। 17 चुनावों में कांग्रेस ने 12 दफा जीत हासिल की है। पांच दफा वीरभद्र परिवार मंडी संसदीय सीट पर जीता है। जबकि तीन दफा सांसद बने हैं। चार बार भाजपा और एक बार मंडी संसदीय सीट से भारतीय लोकदल को जीत मिली है।
साल जीतने वाला हारने वाला
2014 भाजपा रामस्वरूप शर्मा
2013 कांग्रेस प्रतिभा सिंह
2009 कांग्रेस वीरभद्र सिंह
2004 कांग्रेस प्रतिभा सिंह
1999 भाजपा महेश्वर सिंह
1998 भाजपा महेश्वर सिंह
1996 कांग्रेस सुख राम
1991 कांग्रेस सुख राम
1989 भाजपा महेश्वर सिंह
1984 कांग्रेस सुख राम
1980 कांग्रेस वीरभद्र सिंह
1977 भारतीय लोकदल गंगा सिंह
1971 कांग्रेस वीरभद्र सिंह
1967 कांग्रेस ललित सेन
1962 कांग्रेस ललित सेन
1957 कांग्रेस जोगिन्दर सिंह
1952 कांग्रेस अमृत कौर, गोपी राम
वर्ष 2014 में यह रही थी स्थिति
वर्ष 2014 में भाजपा के सांसद राम स्वरूप शर्मा ने वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को करीब 40 हजार मतों से शिकस्त दी। रामस्वरूप को 362824 वोट मिले। प्रतिभा सिंह 322968, कम्युनिस्ट पार्टी के कुशाल भारद्वाज को 13965, आम आदमी पार्टी के जयचंद ठाकुर को 9359 मत मिले।
10 बार लहराया सुखराम परिवार का परचम
वर्ष पार्टी विजेता
1967 कांग्रेस सुखराम
1972 कांग्रेस सुखराम
1977 कांग्रेस सुखराम
1982 कांग्रेस सुखराम
1985 कांग्रेस दुर्गादत्त
1990 कन्हैया बीजेपी
1993 कांग्रेस अनिल शर्मा
1998 हिविकां सुखराम
2003 हिविकां सुखराम
2007 कांग्रेस अनिल शर्मा
2012 कांग्रेस अनिल शर्मा
2017 बीजेपी अनिल शर्मा
भाजपा ने हासिल की थी रिकॉर्ड जीत
वर्ष 2017 के विस चुनावों में पंडित सुखराम परिवार की भाजपा में एंट्री के बाद भाजपा ने यहां से रिकॉर्ड जीत हासिल की। इन चुनावों में भाजपा को मंडी विस क्षेत्र से 10 में से नौ सीटों की शिकस्त मिली। एक सीट पर निर्दलीय चुनाव जीता।
जिसने बाद में भाजपा को समर्थन दिया। मंडी संसदीय क्षेत्र की 17 सीटों में तेरह सीटों पर बड़ी जीत मिली। इस रिकॉर्ड जीत के बाद मंडी से पहली बार सीएम जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बने।