चुनावी मुद्दा: केंद्रीय विवि को नेताओं ने बना दिया सियासी फुटबाल
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हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय को 10 वर्षों में शिलान्यास पत्थर ही नसीब हो पाया है। भवन के नाम पर एक ईंट भी नहीं लग पाई है। 10 साल तक कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने केंद्रीय विवि को राजनीतिक फुटबाल बनाकर रखा। अब फिर लोकसभा चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने के लिए एफसीए की मंजूरी और टेंडर के बिना ही शिलान्यास कर दिया गया।
2019 में धर्मशाला और देहरा में भूमि नसीब तो हुई, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया। धर्मशाला के जदरांगल और देहरा में वन भूमि के लिए अभी तक एफसीए की मंजूरी नहीं मिली है। ऐसे में भवन निर्माण के लिए बिना कोई औपचारिकता पूरी किए बिना ही 21 फरवरी 2019 को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने धर्मशाला और देहरा में विवि का शिलान्यास कर दिया।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 15 अगस्त 2007 को उन सभी राज्यों में एक-एक केंद्रीय विवि बनाने की घोषणा की थी, जहां बड़े संस्थान नहीं हैं। हिमाचल को भी केंद्रीय विवि अनिधियम 2009 पर राष्ट्रपति ने 20 मार्च 2009 को केंद्रीय विवि की स्वीकृति दी। भवन निर्माण को 400 करोड़ की राशि भी आवंटित कर दी। 20 जनवरी, 2010 को केंद्रीय विवि धर्मशाला में पहले उपकुलपति ने कार्यभार संभाला। कक्षाएं शाहपुर में चलीं।
विवि के धर्मशाला और देहरा परिसर के लिए अब तक कुल 417 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की जा चुकी है। इसमें से 303 हेक्टेयर भूमि धर्मशाला के जदरांगल और 114 हेक्टेयर भूमि देहरा में है। जदरांगल में 24 हेक्टेयर भूमि केंद्रीय विश्वविद्यालय के नाम हस्तांतरित की जा चुकी है और देहरा में 34 हेक्टेयर भूमि विश्वविद्यालय के नाम की गई है। देहरा की शेष 84 हेक्टेयर भूमि का वन स्वीकृति का मामला केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया है।
किराये के भवन में सुविधाओं के अभाव में चल रहा सीयू
अब तक सीयू तीन कैंपस में किराये के भवनों में बिना सुविधा के चल रही है। वर्ष 2010 से शाहपुर में अस्थायी भवन में अध्ययन करवाया जा रहा है। दूसरे, धौलाधार कैंपस को किराये के बीएड कॉलेज और छात्र स्कूल भवन में वर्ष 2016-17 में शुरू किया गया।
ब्यास कैंपस देहरा को भी किराये के भवन में ही चलाया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला में 17 अध्ययन स्कूलों के तहत 90 अध्ययन विभाग और लगभग 50 अध्ययन केंद्र शुरू होंगे।
सभी सीयू के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। इससे बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है। सभी राजनीतिक दलों और नेताओं को एकसाथ बैठकर केंद्रीय विवि के बारे में सोचना चाहिए। सीयू में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को कभी शाहपुर, कभी देहरा, तो कभी धर्मशाला शिफ्ट कर दिया जाता है। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई खराब होती है। विद्यार्थियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर रहने की व्यवस्था करने में भी परेशानी होती है। - अदिति, पूर्व छात्रा केंद्रीय विवि
केंद्रीय विवि का दस साल में मात्र नींव पत्थर रखा जाना छात्रों और प्रदेश के साथ धोखा है। केंद्रीय विवि की स्थापना से न केवल प्रदेश के छात्रों को गुणात्मक शिक्षा का लाभ मिलेगा, वहीं प्रदेश में रोजगार के साधन भी खुलेंगे। केंद्रीय विवि के लिए सभी दलों ने मात्र राजनीति की है। विद्यार्थियों और प्रदेश का दर्द किसी ने नहीं समझा। - चंदन आनंद, केंद्रीय विवि शोधार्थी एवं एबीवीपी कार्यकर्ता
सरकार ने चुनावी फायदे के लिए केंद्रीय विवि का शिलान्यास तो कर दिया है, लेकिन इसको लेकर अभी भी औपचारिकताएं पूरी नहीं हैं। यह प्रदेश का दुर्भाग्य है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट को लेकर कोई भी नेता गंभीरता नहीं दिखा रहा है। केंद्रीय विवि की घोषणा के दस साल बाद भी प्रदेश के छात्रों को उच्चतर शिक्षा के लिए बाहरी राज्यों की ओर रुख करना पड़ रहा है, जबकि केंद्रीय विवि बनने से विद्यार्थियों को घर-द्वार उच्चत्तर शिक्षा मिल सकेगी। - पुनीत धीमान, प्रदेश उपाध्यक्ष एनएसयूआई