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वीरभद्र-सुखराम साथ पर दूरियां अभी बरकरार, रैली में डेढ़ घंटे तक नहीं की बात

Wed, 15 May 2019 11:05 AM IST
Krishan Singh अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी
अखिलेश महाजन, अमर उजाला, मंडी Published by: Krishan Singh Updated Wed, 15 May 2019 11:05 AM IST
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lok sabha election 2019: Distances are still intact in virbhadra singh and pandit sukhram
वीरभद्र और सुखराम - फोटो : अमर उजाला

 हिमाचल की सियासत के दो अनुभवी दिग्गज वीरभद्र और सुखराम बेशक लोकसभा चुनावों से पहले गले लग एकजुटता की तस्वीर पेश कर चुके हों। लेकिन बरसों पुरानी टीस अभी भी सार्वजनिक मंच पर नजर आ ही जाती है। कांग्रेस की पारंपरिक मंडी संसदीय में कभी एक दूसरे के विरोधी रहे दोनों वरिष्ठ नेताओं का एक साथ प्रचार भाजपाइयों के लिए नींद उड़ाने वाला माना जा रहा है।

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वहीं मंगलवार को कांग्रेस की न्याय रैली में साथ साथ सीट होने के बावजूद दोनों नेताओं का करीब डेढ़ घंटे तक न बात करना, न हाथ मिलाना कांग्रेस समर्थकों के लिए परेशानी भरा रहा। दोपहर करीब 12 बजे तक राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी के आने या ना आने की तस्वीर साफ नहीं थी। इसी बीच नेताओं ने अलग अलग से एंट्री मारी। 11:55 बजे पंडित सुखराम मंच पर पहुंचे। इसके बाद वीरभद्र सिंह 12 बजे मंच पर आए। वीरभद्र सिंह और सुखराम को साथ साथ बैठाया गया। लेकिन दोनों में से किसी ने भी एक-दूसरे की ओर नहीं देखा, न ही हाथ मिलाया।

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दोनों चुपचाप बैठे रहे

lok sabha election 2019: Distances are still intact in virbhadra singh and pandit sukhram
वीरभद्र और सुखराम - फोटो : अमर उजाला

दोनों चुपचाप बैठे रहे। एक तरफ सुखराम की बगल में सह प्रभारी गुरकीरत सिंह दूसरी तरफ वीरभद्र की बगल में आनंद शर्मा बैठे रहे। इस बीच में दोनों अगल बगल  नेताओं से वार्ता करते रहे।

दोपहर 1:20 बजे पंडित सुखराम जनसभा को संबोधित करने उठे और उन्होंने 10 मिनट तक भाषण दिया। रैली खत्म होने से पहले जब सुखराम ने हाथ बढ़ाया तभी वीरभद्र ने भी हाथ बढ़ाकर बात की। दोनों नेताओं का एक-दूसरे के साथ बेरुखी से पेश आना खूब चर्चा में रहा।

हालांकि वीरभद्र सिंह व सुखराम दोनों ने अपने संबोधन में आश्रय शर्मा के लिए खुलकर समर्थन और मत मांगे। उल्लेखनीय है कि पंडित सुखराम के कांग्रेस में आने के बाद कई बार वीरभद्र सिंह उन्हें अपने निशाने में लेते रहे हैं और जुबानी हमला करते रहे हैं।

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