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गाड़ियों पर बैनर लगाकर ‘प्रचार’ कर रहे भाजपा के कार्यकर्ता

Fri, 12 Apr 2019 01:25 PM IST
अरविन्द ठाकुर प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला
प्रखर दीक्षित, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 12 Apr 2019 01:25 PM IST
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lok sabha election 2019 BJP workers election campaigning by posters on cars and other vehicles
- फोटो : अमर उजाला

आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भले ही झंडा-बैनर लगाने को लेकर निर्वाचन आयोग सख्ती करने का दावा कर रहा हो, लेकिन प्रदेश भाजपा के नेता और कार्यकर्ता बगैर आयोग की अनुमति के गाड़ियों पर भाजपा के बैनर लगाकर ‘प्रचार’ कर रहे हैं। भाजपा नेताओं ने तो चुनावी खर्च की काट निकाल ली है लेकिन कांग्रेस के नेता नई राह तलाश रहे हैं।

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नियमों की कमजोर कड़ी पकड़ भाजपा के नेता राजधानी शिमला से लेकर प्रदेश के हर जिले में इस तरह के वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। इनमें आम नेताओं व कार्यकर्ताओं से लेकर एमएलए लिखे वाहन तक शामिल हैं। लेकिन चुनाव अधिकारी इन वाहनों के नाम अपने रजिस्टर में जोड़ने के अलावा और कुछ नहीं कर पा रहे।
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ऐसा इसलिए है क्योंकि पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने प्रचार के लिए बने नियमों में ही कमियां तलाशकर इस बार उनका पूरा फायदा उठाना शुरू कर दिया है। मतदान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अगर प्रत्याशी के नाम के बिना कोई बैनर लगता है तो उसका खर्च पार्टी के खाते में जाएगा।

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लेकिन ऐसे कथित ‘प्रचार’ वाहन दिन भर कितने किलोमीटर चलते हैं और कितना तेल इनमें खपता है, इसके खर्च को लेकर वह मौन है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के निजी वाहनों को प्रचार वाहन की श्रेणी में नहीं लाया जा सकता।

हालांकि, वाहन में लगे बैनर का खर्च जरूर पार्टी के खर्च में जोड़ा जा सकता है। प्रदेश निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों ने कहा कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों के अधीन गठित टीमें ऐेसे वाहनों पर नजर रख रही है। इनके रिकार्ड बनाकर पार्टियों के खर्च में जोड़ा जा रहा है।

क्या कहता है नियम
नियम के अनुसार अगर किसी प्रत्याशी का फोटो या नाम किसी बैनर या पोस्टर में लगा होता है तो उसका खर्च प्रत्याशी के खर्च में जुड़ जाता है। जबकि सिर्फ पार्टी या प्रदेश अथवा राष्ट्रीय स्तर के किसी नेता के नाम पर प्रचार हो तो वह पार्टी के खर्च में जुड़ता है।

प्रत्याशी के लिए 70 लाख रुपये की लिमिट आयोग ने चुनावी खर्च के लिए तय की है लेकिन यह लिमिट नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के बाद ही लागू होगी। जबकि पार्टी के खर्च की कोई लिमिट चुनाव आयोग ने तय नहीं की है।

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