उधार के उम्मीदवारों से कांग्रेस ने संजोए जीत के सपने : सतपाल सत्ती
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छात्र राजनीति से सक्रिय राजनीति में आए सतपाल सत्ती लगातार दूसरी बार हिमाचल में भाजपा की कमान संभाले हुए हैं। प्रदेश में कई ध्रुवों में बंटी भाजपा को एक धागे में पिरोने की जुगत में जुटे सत्ती कई बार अपने बड़बोले पन के कारण विवादों में भी आ चुके हैं। चुनाव प्रचार के दौरान दो बार सत्ती को चुनाव आयोग का नोटिस जारी हो चुका है। 48 घंटे तक प्रचार पर रोक भी लग चुकी है।
बावजूद इसके सत्ती की बयानबाजी की धार कम नहीं हुई है। विधानसभा चुनाव में भाजपा को जीत का सेहरा पहनाने के बाद अब लोकसभा की चारों सीटें भी मोदी की झोली में डालने के लिए सत्ती पूरी ताकत झोंकी हुई है। अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता अनिमेष कौशल ने सतपाल सिंह सत्ती से विशेष बातचीत की। पेश हैं इसके अंश :
सवाल : भाजपा हिमाचल में कितनी लोकसभा सीटें जीत रही है?
सत्ती : भाजपा हिमाचल में चारों संसदीय सीटों पर जीत दर्ज करेगी। कांग्रेस उधार के उम्मीदवारों से जीत के सपने संजो रही है। सिर्फ रामलाल ठाकुर कांग्रेस के असली प्रत्याशी हैं। बाकी तीनों प्रत्याशी भाजपा से जुड़े हुए रहे हैं। जनता भी असली और नकली में फर्क समझती है। हमीरपुर में एक लाख और शिमला, मंडी व कांगड़ा सीट 50-50 हजार के अंतर से भाजपा जीतेगी।
सवाल : चुनाव प्रचार में दिए गए विवादित बयान रणनीति का हिस्सा थे या यूं ही बोल दिए?
सत्ती : कोई भी बयान रणनीति के तहत नहीं दिया गया। मैं आज भी जिला सोलन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दिए गए बयान पर अडिग हूं। टीआरपी के चक्कर में सीधी बात को मीडिया ने भड़काऊ बना दिया। मैंने किसी की फेसबुक पोस्ट को पढ़ा था। जिसे मीडिया ने गलत तरीके से पेश किया। मैंने बात किस संदर्भ में कही, यह किसी ने भी स्पष्ट नहीं किया।
सवाल : पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को लेकर भाजपा डिफेंसिव मोड में क्यों है?
सत्ती : वीरभद्र सिंह की उम्र का लिहाज करते हुए पार्टी उनके खिलाफ ज्यादा पलटवार नहीं कर रही है। जहां जरूरत होती है, वीरभद्र सिंह के आरोपों का जवाब दिया भी जा रहा है। ममता बनर्जी की तरह भाजपा पत्थर नहीं मार सकती। पांच साल के दौरान केंद्र सरकार के कार्यों के नाम पर भाजपा वोट मांग रही है। आरोप-प्रत्यारोप की भाजपा राजनीति नहीं करती है।
सवाल : असंतुष्ट नेताओं के भितरघात को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सत्ती : सबकी इच्छाओं की पूर्ति करना मुश्किल होता है। इस कारण कई बार मतभेद हो जाते हैं। बावजूद इसके पार्टी ने सभी को एकजुट रखते हुए चुनाव प्रचार किया है। पार्टी में कोई भी असंतुष्ट नहीं है न ही किसी तरह के भितरघात का खतरा है। अगर कहीं से भितरघात की सूचना प्राप्त हुई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सवाल : विधानसभा चुनाव में सुखराम साथ थे, अब खिलाफ हैं। इसकी भरपाई कैसे करेंगे?
सत्ती : विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिली जीत का श्रेय सुखराम परिवार को नहीं जाता है। भाजपा के प्रत्याशियों ने सीटें जीतीं। अब सुखराम परिवार के कांग्रेस में जाने से भाजपा को कोई नुकसान भी नहीं हुआ है।
मोदी और जयराम के काम के आधार पर लोग वोट देंगे। पंडित सुखराम ने मंडी के लिए आजतक कोई काम नहीं किया। इसी तरह धनीराम शांडिल भी सांसद और मंत्री रहते कोई काम नहीं कर सके।