हिमाचल में लगातार सुधर रही है साक्षरता दर, हुआ दो फीसदी इजाफा
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हिमाचल प्रदेश में साक्षरता दर लगातार सुधर रही है। साल 2011 में हुई 83.78 फीसदी साक्षरता दर की गणना के मुकाबले साल 2017 में दो फीसदी इजाफा हुआ। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश देश की साक्षरता दर 85 फीसदी से अधिक है। नेशनल सैंपल सर्वे आर्गेनाइजेशन ने साल 2017 में सैंपल सर्वे किया था, जिसमें प्रदेश की साक्षरता दर बढ़ने की बात सामने आई।
जानकारों के मुताबिक हिमाचल प्रदेश में लगातार साक्षरता दर बढ़ रही है। 90 फीसदी साक्षरता दर वाले राज्यों की संख्या भी काफी है। ऐसे में हिमाचल के लिए 90 फीसदी से ज्यादा साक्षरता दर वाला राज्य बनना चुनौती रहेगा।
साल 1951 में हिमाचल प्रदेश की साक्षरता दर 7.98 फीसदी थी। इसके बाद हर दस साल बाद हुई साक्षरता की गणना में प्रदेश ने लगातार बढ़ोतरी दर्ज की है। साल 1961 में साक्षरता दर 21.03 फीसदी, 1971 में 31.71 फीसदी, 1981 में 42.33, 1991 में 63.75, 2001 में 76.48 और साल 2011 में हुई गणना में साक्षरता दर 83.78 फीसदी रिकार्ड हुई। साल 2011 में हुई गणना में प्रदेश के हमीरपुर जिला की साक्षरता दर सबसे अधिक है।
जिला की साक्षरता दर 89.01 फीसदी है। इसके बाद ऊना की 87.23, कांगड़ा की 86.49, बिलासपुर की 85.67, सोलन की 85.02, शिमला की 84.55, मंडी की 82.81, किन्नौर 80.77, कुल्लू की 80.44, सिरमौर 79.98, लाहौल स्पीति की 77.24 और चंबा की साक्षरता दर सबसे कम 73.19 फीसदी थी। भारत सरकार नई साक्षरता दर साल 2021 में घोषित करेगी। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के पास अभी भी अपने स्तर में सुधार लाने के लिए पर्याप्त मौका है।
प्रवासी श्रमिक अलग कर दें तो 96 फीसदी है साक्षरता दर
बीते दिनों ही शिक्षक दिवस के राज्य स्तरीय समारोह के दौरान शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने खुलासा किया था कि अगर प्रवासी श्रमिकों को अलग कर दिया जाए तो राज्य की साक्षरता दर 96 प्रतिशत से अधिक हो जाती है। उन्होंने दावा किया था कि केरल राज्य के बाद हिमाचल शिक्षा में देश भर में दूसरे स्थान पर है।