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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Life sentence for murder remains intact, High Court rejects appeal

Shimla News: हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा बरकरार, हाईकोर्ट ने अपील को किया खारिज

Sat, 23 Sep 2023 06:08 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 23 Sep 2023 06:08 PM IST
सार

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सिरमौर निवासी शुपा राम की अपील को खारिज कर दिया है। 

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Life sentence for murder remains intact, High Court rejects appeal
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के जुर्म के लिए सुनाई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने सिरमौर निवासी शुपा राम की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि हत्या के जुर्म के लिए विचारण अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सही निर्णय सुनाया है।

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सत्र न्यायाधीश सिरमौर के निर्णय को हाईकोर्ट के समक्ष अपील से चुनौती दी थी। विचारण अदालत ने दोषी को पत्नी की हत्या करने के जुर्म के लिए दोषी ठहराया था। इस जुर्म के लिए अदालत ने उसे उम्र कैद और 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। अदालत ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड का अवलोकन पर पाया कि शुपा राम की शादी सत्या देवी से हुई थी।
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उनके पांच बच्चे थे जो अपने चाचा के साथ जाखल गांव में रहते थे। 19 मई 2015 को बड़ा बेटा उनसे मिलने आया। सत्या ने बेटे से कहा कि उसके पिता ने उससे मारपीट की है। मामला सुलझ जाने के बाद तीनों ने एक साथ खाना खाया। सुबह शुपा राम ने बेटे को कहा कि चाचा से कुछ पैसों का इंतजाम कर ताकि सत्या देवी की चिकित्सा जांच की जा सके।
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सुबह साढ़े छह बजे बेटा पैसों का इंतजाम करने के लिए चाचा के घर चला गया। उसे चाचा रास्ते में ही मिल गया। उसके बाद दोनों वापस लौट आए। उन्होंने देखा कि सत्या देवी घर के बाहर लहूलुहान पड़ी थी। दोनों ने उसे उठाया और रसोई में ले गए। लेकिन तब तक वह मर गई थी।


इस दौरान शुपाराम सोया हुआ था। बेटे ने पुलिस को सारी बात बताई और शुपा राम के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया। गवाहों और बयानों के आधार पर विचारण अदालत ने शुपा राम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी जिसे हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।

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