हिमाचली बोलियों के विलुप्त होने से चिंतित भाषा के जानकार
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हिमाचल में स्थानीय बोलियों के विलुप्त होने पर भाषा के जानकारों ने चिंता जताई है। वे पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए वेबिनार के माध्यम से हिमाचल की बोलियों पर चर्चा कर रहे थे। भाषा विभाग की ओर से आयोजित वेबिनार में पहाड़ी भाषा को बढ़ावा देने के लिए चार जिलों सोलन, शिमला, सिरमौर और बिलासपुर की स्थानीय बोलियों के उत्थान पर विचार-विमर्श किया गया। विभाग की सहायक निदेशक कुसुम संघाईक ने कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले वक्ताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. गौतम व्यथित ने की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में स्थानीय बोलियों का इस्तेमाल आम है, लेकिन शहरों में खासतौर पर युवा वर्ग भाषा के इस्तेमाल से परहेज कर रहा है।
इससे स्थानीय बोलियां खत्म होने की कगार पर हैं। उन्होंने युवाओं को पहाड़ी भाषा से जोड़े रखने के लिए स्कूल स्तर पर नियमित रूप से पहाड़ी बोली में कार्यक्रम करवाने का सुझाव दिया। कुसुम संघाईक ने कहा कि भाषा विभाग एक नवंबर को पहाड़ी दिवस का आयोजन करेगा। इसी कड़ी में पहाड़ी सप्ताह का आयोजन किया जा रह है। इसमें प्रदेश भर के जिलों को सिलसिलेवार चर्चा में शामिल किया जा रहा है। इस मौके पर शिमला से भूप रंजन और ओपी शर्मा, सोलन से मदन हिमाचली और अमरदेव अंगीरस, सिरमौर के विद्यानंद सरैक और ओम प्रकाश राही, बिलासपुर से कुलदीप चंदेल और राम लाल ठाकुर ने हिस्सा लिया।