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हिमाचल में लोकायुक्त लागू, जानें ये खास बातें
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 01 Jul 2015 08:42 AM IST
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हिमाचल में संशोधित लोकायुक्त एक्ट लागू हो गया है। राज्य सरकार ने मंगलवार को इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राष्ट्रपति से इस एक्ट पर हाल ही में मंजूरी मिली थी। इसके बाद राज्यपाल ने इसे अपनी स्वीकृति देकर सरकार को भेज दिया था। लोकायुक्त एक्ट के दायरे में मुख्यमंत्री से लेकर आम आदमी तक आएंगे। एक्ट के तहत अब प्रदेश में प्रत्येक लोकसेवक को अपनी संपत्ति और देनदारियों की घोषणा करनी होगी।
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लोकायुक्त में नियुक्त अधिकारियों के खिलाफ अगर भ्रष्टाचार की कोई भी शिकायत मिलेगी तो उसकी जांच 30 दिन के भीतर पूरी करनी होगी। लोकायुक्त हर रिपोर्ट पर सुनवाई करेगा। हर लोकसेवक को अपनी बात कहने का मौका भी दिया जाएगा। इसमें तय किया जाएगा कि प्रारंभिक तौर पर कोई मामला बनता है या नहीं। लोकायुक्त जांच के लिए किसी भी विभाग के अधिकारी का उपयोग कर सकेगा।
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लोकायुक्त का सचिव राज्य सरकार के सचिव के बराबर होगा। एक जांच निदेशक और एक अभियोजन निदेशक होगा। यह अधिकारी राज्य सरकार के अतिरिक्त सचिव या उसके समकक्ष की पंक्ति के नीचे का नहीं होगा। लोकायुक्त किसी भी व्यक्ति को समन दे सकेगा, हाजिर कर सकेगा और परीक्षा कर सकेगा।
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कौन होगा लोकायुक्त
लोकायुक्त ऐसा व्यक्ति होगा जो उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो या उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश रहा हो। लोकायुक्त की नियुक्ति पांच साल के लिए या 70 साल की आयु सीमा पूरा करने तक होगी।
मुख्यमंत्री होंगे समिति के अध्यक्ष
लोकायुक्त के चयन के लिए बनाई गई समिति के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। इसके सदस्य विधानसभा अध्यक्ष, विधानसभा में विपक्ष का नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे।
हाईकोर्ट की तर्ज पर मिली शक्तियां
लोकायुक्त के आदेश की अवमानना पर इसे वही शक्तियां दी गई हैं जैसे उच्च न्यायालय के पास हैं। लोकायुक्त का कर्तव्य होगा कि वह साल में एक बार अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को दे।