लाहौल: द्रुकपा कुंगफू नन्स ने जीता मार्शल आर्ट्स शिक्षा पुरस्कार, यूनेस्को ने किया सम्मानित
मार्शल आर्ट के माध्यम से द्रुकपा नन्स युवा लड़कियों को अपना बचाव करने, आत्मविश्वास बनाने और अपने समुदायों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाती हैं। इस द्रुकपा में यशे, कोनचोग, देचेन, सोनम, जिग्मे सहित अन्य शामिल है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
बौद्ध धर्म के द्रुकपा संप्रदाय के विश्व प्रसिद्ध द्रुकपा कुंगफू-नन्स को कोरिया में यूनेस्को इंटरनेशनल सेंटर फॉर मार्शल आर्ट्स से प्रतिष्ठित मार्शल आर्ट्स शिक्षा पुरस्कार 2021 मिला है। मार्शल आर्ट के माध्यम से द्रुकपा नन्स युवा लड़कियों को अपना बचाव करने, आत्मविश्वास बनाने और अपने समुदायों में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए सशक्त बनाती हैं। इस द्रुकपा में यशे, कोनचोग, देचेन, सोनम, जिग्मे सहित अन्य शामिल है। यूनेस्को आईसीएम का यह पुरस्कार कुंगफू नन्स के भारतीय और नेपाली समुदायों के काम को भी मान्यता देता है। विशेष रूप से महामारी से प्रभावित कई हाशिए पर रहने वाले समूहों को आपूर्ति और शिक्षा की आवश्यकता होती है। कुंग फू नन्स भारतीय बौद्ध धर्म के द्रुक्पा वंश से हैं और ताकत और आत्मविश्वास बनाने के लिए उन्होंने कुंगफू सीखना शुरू किया। इनमें ज्यादातर हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति, किन्नौर, लद्दाख, नेपाल आदि हिमालयन क्षेत्रों से है।
काठमांडू से लद्दाख तक 2500 किमी की थी साइकिल यात्रा
हाल ही में कुंगफू-नन्स की वीर योद्धाओं ने नेपाल के काठमांडू से भारत के लद्दाख तक करीब 2500 किलोमीटर लंबी शांति साइकिल यात्रा पूरी की। कुंगफू नन्स को अटलांटिक काउंसिल के प्रतिष्ठित अनसंग हीरोज अवार्ड 2020 और एशिया सोसाइटी के गेम चेंजर अवार्ड 2019 से भी सम्मानित किया जा चुका है। अवार्ड जीतने पर द्रुकपा के धर्मगुरु महामहिम ज्ञलवांग द्रुकपा, धर्मगुरु कुंगा रिनपोछे, वाईडीए गरशा के अध्यक्ष सुशील, पूर्व अध्यक्ष सोनम जांगपो, प्रेस सचिव कुंगा बोध ने भी बधाई दी।