हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के शैंशर में बस हादसे के बाद शांत वादियों में चीखें गूंज उठीं। लोग मदद को घरों और खेतों से पहुंच भी गए, लेकिन जिला प्रशासन को करीब एक घंटे बाद सूचना दी गई। घायल यात्री मदद मांगते रहे, लेकिन लोग चाहकर भी कुछ नहीं कर पाए। बस को हाथों से उठा पाना संभव नहीं था। मौके पर सैकड़ों लोगों की तमाम कोशिशें नाकाम रहीं। कुल्लू से राहत टीम आने में दो घंटे लग गए। निजी ऑपरेटर की जेसीबी भी दो घंटे बाद मौके पर पहुंच गई, लेकिन छोटी होने के चलते बस के नीचे दबे घायलों को नहीं निकाल सकी।
Kullu Accident: बस के नीचे से आ रही थीं बचाओ-बचाओ की आवाजें, बेबस लोगों के निकले आंसू, तीन घंटे बाद पहुंची जेसीबी
चीख पुकार की आवाज सुनकर क्षेत्र के लोग दौड़े-दौड़े पहुंचे तो देखकर सभी दंग रह गए। जांगला गांव के पास बस सड़क से करीब 200 फीट नीचे खाई में गिरी थी।
सोमवार सुबह करीब 8:18 बजे यह हादसा हुआ। सुबह करीब 8:50 बजे ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने इसकी सूचना प्रशासन और पुलिस को दी। सुबह 9:00 बजे ग्रामीण प्रशासन और पुलिस की मदद का इंतजार करते रहे। बस में फंसे लोगों को निकालने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन एक भी सवारी को नहीं निकाल पाए। 10:30 बजे 108 एंबुलेंस भी पहुंच गई, लेकिन बस उलटी पड़ी होने के कारण यात्रियों को निकालना मुश्किल था। 11:00 बजे कुल्लू और बंजार से स्वास्थ्य विभाग की टीमें पहुंचीं। करीब 11 बजे बड़ी जेसीबी मशीन मौके पर आई, जिसकी सहायता से बस को सीधा किया गया और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकाला गया।
बताया जा रहा है कि बस करीब 13 साल पुरानी थी। जांगला गांव के नजदीक हुए भूस्खलन के पास बस को निकालते वक्त वह पहाड़ी से होकर नीचे जा गिरी। जिस जगह हादसा हुआ, वह मार्ग भूस्खलन के चलते संकरा हो गया था। इस मार्ग पर न तो क्रैश बैरियर और न ही पैरापिट हैं। इस मार्ग पर अगर क्रैश बैरियर व पैरापिट होते तो कई लोगों की जानें बच जातीं। बस चालक की हालत भी गंभीर बनी हुई है। वह कुछ भी कहने की हालत में नहीं है। घायल सवार एक व्यक्ति की हालत भी गंभीर बनी है। परिचालक गोपाल ने कहा कि बस जब नीचे लुढ़की, तब उन्हें हादसे का एहसास हुआ। बताया जा रहा है कि जैसे ही बस ने सड़क से पलटा खाया तो कुछ सवारियां बाहर छिटक गई थीं। इनमें चालक, परिचालक और एक अन्य व्यक्ति था। लोनिवि ने इस सड़क का कुछ माह पूर्व टारिंग कर इसे पक्का किया है।
सैंज और शैंशर के ग्रामीणों ने भयावह बस हादसे के बाद सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों समेत एनएचपीसी और एचपीपीसीएल पर जमकर भड़ास निकाली। आरोप है कि दोनों प्रोजेक्टों के अधिकारियों ने घटना के बाद फोन नहीं उठाया। मशीनें आने के बावजूद समय पर घटनास्थल पर नहीं भेजा। इस कारण कई लोगों की जान चली गई। समय रहते गैस कटर मिलता तो उससेे बस के भाग को काटकर लोगों को बाहर निकालकर जान बचाई जा सकती थी, लेकिन प्रशासन ने छोटी मशीन भेजकर लोगों को तड़पने के लिए छोड़ दिया। लोगों के आक्रोश का एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। इसमें लोगों ने कहा कि सरकार, प्रशासन और एनएचपीसी, एचपीपीसीएल की नालायकी के कारण हादसा हुआ है।
विधायक सुरेंद्र शौरी और उपमंडलाधिकारी बंजार पीसी आजाद को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों प्रोजेक्टों ने एक हाइड्रा भी बस को उठाने के लिए नहीं भेजा। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी भी समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंचे। लोगों ने कहा कि शैंशर मार्ग पर खटारा बसों को चलाया जा रहा है। इस वजह से हादसे हो रहे हैं। ऐसी बसों को तुरंत बंद कर देना चाहिए। हमारे परिवार पैदल ही सफर करेंगे। कम से कम उनकी जान तो बच जाएगी। अगर किसी बड़े नेता और अफसर का परिवार बस में सवार होता तो दर्द का अहसास होता, लेकिन सरकार और प्रशासन को यहां के लोगों की कोई चिंता नहीं है।