शिमला: राठौर बोले- अफगानिस्तान के रास्ते अवैध रूप से आ रहा सेब, पांच हजार करोड़ की आर्थिकी पर मंडरा रहा संकट
प्रदेश के सेब कारोबार पर संकट मंडरा रहा है। यह बात पत्रकारों से रू-ब-रू हुए ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कही।
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ईरान का सेब अवैध रूप से अफगानिस्तान के रास्ते आयात हो रहा है। इसका सीधा असर बागवानी के पांच हजार करोड़ की आर्थिकी और बागवानों पर पड़ रहा है। प्रदेश के सेब कारोबार पर संकट मंडरा रहा है। यह बात पत्रकारों से रू-ब-रू हुए ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर ने कही। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि विदेशों से आयात किए जा रहे सेब पर तुरंत रोक लगाई जाए। उन्होंने सांसदों से भी इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से मुद्दे को उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के करीब 22 विधानसभा क्षेत्रों में सेब की पैदावार होती है। इससे लाखों परिवार सीधे जुड़े हैं। बागवानों और प्रदेश के हितों को ध्यान में रखते हुए नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी केंद्र सरकार के समक्ष इस मामले को उठाए।
राठौर ने कहा कि विधानसभा के बजट सत्र में वे सेब बागवानी से जुड़े इस मामले को उठाएंगे। प्रदेश के बागवानों का कोल्ड स्टोर और सीए स्टोर में सेब रखा हुआ है। विदेशों से आयात हो रहे सेब से उसके दाम गिरेंगे। इससे सेब बागवानों का नुकसान होगा। इस कारण ऑफ सीजन में उन्हें उम्मीद के अनुसार सेब के दाम नहीं मिल पाएंगे। बागवान हर माह के हिसाब से सीए स्टोर का इसी उम्मीद में किराया चुका रहा है कि उसे उसकी फसल के अच्छे दाम मिलेंगे।
राठौर ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों का खामियाजा बागवानों को भुगतना पड़ेगा। यूएसए, तुर्कीये, इटली, न्यूजीलैंड और पॉलैंड का सेब अफगानिस्तान के रास्ते से भारत में आ रहा है। अफगानिस्तान में ड्राई फ्रूट का उत्पादन होता है। दूसरे देशों का सेब अफगानिस्तान के रास्ते लाया जा रहा है। अफगानिस्तान के साथ भारत की हुई संधि के चलते वहां से होने वाले उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगता। इसलिए सेब वहीं से भारत में लाया जा रहा है। इस गोरखधंधे के कारण हिमाचल के सेब के दाम गिर रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आयात शुल्क को दोगुना करने के वादे को पूरा करने की मांग की है।
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम पर भी घेरी सरकार
राठौर ने कहा कि डीजल और पेट्रोल के दाम स्थिर हैं। कच्चे तेल के दाम लगातार गिर रहे हैं। जून 2022 में 120 रुपये प्रति बैरल कच्चा तेल था फरवरी 2024 में 77 रुपये प्रति बैरल है। कंपनियां लगातार मुनाफा कमा रही हैं और आम लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है।