रसीले किन्नौरी सेब की बाजार में दस्तक, इतने में बिक रही दस किलो की पेटी
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रसीले किन्नौरी सेब ने बाजार में दस्तक दे दी है। बेहतर क्वालिटी के चलते देश-दुनिया में मशहूर किन्नौरी सेब चंडीगढ़ और दिल्ली की मंडियों में पहुंच गया है। लोअर किन्नौर से ये सेब मंडियों में पहुंचना शुरू हो गया है, जबकि अपर किन्नौर के चांगो, ताबो और नाको से अगले हफ्ते मंडी में सेब पहुंचेगा। चंडीगढ़ और दिल्ली की फल मंडियों में किन्नौरी सेब का गिफ्ट पैक (10 किलो पैकिंग) 1000 से 1200 रुपये प्रति पेटी बिक रहा है।
किन्नौर की भावा वैली के ऊरी गांव निवासी भगत नेगी ने बताया कि किन्नौरी सेब प्राकृतिक रूप से लंबोतरा (लंबा आकार) होता है। सेब का छिलका साफ होता है और रंग चटक। काफनू के अतुल नेगी ने बताया कि किन्नौर में परंपरागत तरीके से कूलहों का पानी बागीचों तक पहुंचा कर सिंचाई के जरिये सेब तैयार किया जा रहा है। इसलिए यह अधिक रसीला होता है।
चांगो, ताबो और नाको में रासायनिक खादों और स्प्रे का इस्तेमाल बहुत कम किया जा रहा है। भावा वैली के यांगपा निवासी प्रवीण नेगी ने बताया कि उनके बगीचे में सेब तैयार हो गया है और दो-तीन दिन में तुड़ान शुरू हो जाएगा। सेब कारोबारी राकेश शर्मा और सतीश नेगी ने बताया कि लोअर किन्नौर बेल्ट से सेब मंडियों में आना शुरू हो गया है। अधिकतर माल स्टोर किया जाता है।
किन्नौरी सेब की मार्केट में आमद शुरू हो गई है। प्राकृतिक रूप से बढ़िया क्वालिटी के चलते इस सेब की मंडी में खूब मांग है। अच्छी पैकिंग में पहुंच रहे बढ़िया सेब की गिफ्ट पैक पेटी 1000 से 1200 रुपये तक बिक रही है। - अश्वनी चौहान, चेयरमैन, आढ़ती एसोसिएशन पंचकूला
किन्नौरी सेब में प्राकृतिक रूप से फाइबर, मिनरल और ट्रेस एलीमेंट अधिक होते हैं। फाइबर पाचन क्रिया के लिए बेहतर है। शरीर की तंदरुस्ती के लिए मिनरल की आवश्यकता होती है। जिनके शरीर में ट्रेस एलीमेंट की कमी है, उनके लिए यह अधिक फायदेमंद है। - प्रोफेसर राजीव रैना, मेडिसन डिपार्टमेंट आईजीएमसी
इस साल 15 से 18 लाख पेटी होगा उत्पादन
किन्नौर में सेब का सालाना औसतन 25 से 30 लाख पेटी उत्पादन होता है। इस साल फसल कम है, जिसके चलते 15 से 18 लाख पेटी सेब उत्पादन का अनुमान है।