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जब आवारा कुत्तों को जान से मारने के विवाद में फंसे गांधी

Thu, 16 Apr 2015 01:43 PM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर/ अमर उजाला, शिमला
दयाशंकर शुक्ल सागर/ अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 16 Apr 2015 01:43 PM IST
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Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

और ये तो एक दिन होना ही था। शिमला में आतंक फैलाने वाला एक कुत्ता आखिर मर गया। जांच में पता चला उसे रैबीज था। यानी उसने जिन लोगों को अपना शिकार बनाया, अगर उन्होंने चौबीस घंटे के अंदर एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं ली है तो उनका जीवन खतरे में है।

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रैबीज एक ऐसी खतरनाक बीमारी है जिसका जिक्र करने भर से रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैंने ऐसे मरीज को देखें हैं। ठीक इलाज न हो तो ये रोगी अपने अंतिम दौर में खुद एक कुत्ते में तबदील हो जाते हैं।
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इससे खौफनाक बात और कुछ नहीं हो सकती कि कोई इंसान अपने शाब्दिक अर्थ में पागल कुत्ते की मौत मरे। इसलिए अब वक्त आ गया है कि इस बारे में गंभीर चर्चा कर ली जाए। शहर के आवारा कुत्तों ने पिछले एक हफ्ते में कोई पचास लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। इनमें बुजुर्ग, मासूम बच्चे, महिलाएं सब शामिल हैं।
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इन आवारा कुत्तों में कितनों को रैबीज था, इसका कोई डाटा नगर निगम के पास नहीं है। यह आंकड़े सिर्फ शिमला शहर के हैं। आवारा कुत्तों और शरारती बंदरों की समस्या से हिमाचल के लगभग सभी शहर प्रभावित हैं।

कुत्तों बंदरों के आतंक से मुक्त करने के लिए गंभीर नहीं सरकारें

Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

सच तो यह है कि शहर को कुत्तों और बंदरों के आतंक से मुक्त करने के लिए किसी सरकार ने अब तक कोई गंभीर प्रयास नहीं किया। कुत्तों की नसबंदी के अभियान चले लेकिन दिखावे के लिए।

लाखों रुपए खर्च हो गए और कुत्ते नगर निगम की कुत्ता पकड़ने वाली गाड़ियों के पीछे भागते उन्हें मुंह चिढ़ाते दिखाई पड़ेते हैं। बंदरों की नसबंदी का कोई असर होता नहीं दिखता।

बजट सत्र में एक दिन विधानसभा में आवारा कुत्तों की समस्या पर दिलचस्प बहस चल रही थी। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लेकर नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल तक इसे लेकर चिंतित दिखे।

लेकिन करें क्या? क्या शहर के सभी आवारा कुत्तों को लाइन से खड़ा कर गोली मार दें? या इन्हें कोई और सम्मानजनक मौत दें? जवाब आया ऐसा करें तो कुत्तों के बचाव में मेनका गांधी सामने आ जाती हैं।

महात्मा गांधी भी फंसे विवाद में

Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

सुप्रीम कोर्ट सामने आ जाता है, जिसने आवारा कुत्तों व बंदरों को मारने पर रोक लगा रखी है। शिमला के वह दयालु सामने आ जाते हैं जो जीव हत्या देख नहीं सकते। वे आवारा कुत्तों की हत्या को पाप समझते हैं।

लेकिन क्या मनुष्य को नुकसान पहुंचने वाले आवारा कुत्तों की हत्या सचमुच गलत है? एक बार महात्मा गांधी ऐसे ही धर्म संकट में बुरी तरह फंस गए थे।

अहमदाबाद के उनके एक मील मालिक मित्र ने 60 आवारा कुत्तों को लाइन से खड़ा कर गोली मार दी थी। गांधीजी ने इसका समर्थन किया और वे विवाद में घिर गए।

अहिंसा का पुजारी आवारा कुत्तों की हत्या के पक्ष में खड़ा था। गांधी ने अपनी पत्रिका नवजीवन में इस पर एक लंबी बहस शुरू की और इस नतीजे पर पहुंचे कि आवारा कुत्तों की हत्या एक सही कदम है।

क्योंकि कुत्तों की कीमत पर इंसानों की जिंदगी खतरे में डालना महापाप है। उन्होंने शहरियों को यह भी सलाह दी कि वे आवारा कुत्तों को खाना न दें। क्योंकि उन्हें खाना देकर आप अपनी मुश्किल और बढ़ा रहे हैं।

गांधी मानते थे, आवारा कुत्ते समाज की सभ्यता या दया के चिह्न नहीं

Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

ये आवारा कुत्ते पागल कुत्ते द्वारा काटे जाने पर खुद रैबीज का शिकार होंगे और एक तरह के आतंकवादी बन जाएंगे। गांधी मानते थे- आवारा कुत्ते समाज की सभ्यता या दया के चिह्न नहीं हैं बल्कि समाज के अज्ञान तथा आलस्य के चिन्ह हैं। इस विचार के विरोध में गांधी पर खूब हमले हुए लेकिन वे अंत तक अपनी बात पर अडिग रहे।

जीवों को मारने में पाप लगता है। सभी धर्मों में इस सिद्धांत को स्वीकार किया गया है लेकिन सिद्धांत ढूंढ निकालने में कोई कठिनाई नहीं होती।

सारी मुश्किल केवल उस पर अमल करने में ही आती है। सिद्धांत का अर्थ है अमुक विषय की पूर्णता लेकिन अमल करने वाले हम मनुष्य अपूर्ण हैं। इंसानियत का सबसे उत्तम विकल्प तो यह है कि हम कुत्तों को अपनाएं और उनकी जिम्मेदारी लें कि वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

कुत्तों बंदरों से निजात के लिए हमें कठोर कानून बनाने होंगे

Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

यह नहीं कर सकते तो उन संस्थाओं को आर्थिक मदद दें जो लावारिस कुत्तों को पालते हैं। नहीं तो कठोर होना पड़ेगा। घर में सांप को देखकर हम उसे इसलिए नहीं छोड़ देते कि उसने किसी को काटा नहीं। अभी हम इतने सभ्य और विकसित नहीं हुए कि जानवरों के साथ मित्रवत तरीके से रह सकें।

तो कुत्तों/बंदरों की समस्या से निजात पाने के लिए हमें कठोर कानून बनाने होंगे। जैसा लंदन जैसे यूरोपीय शहरों में हैं। वहां जिस कुत्ते के गले में उसके मालिक के नाम का पट्टा नहीं है उसे तुरंत मारने का कानून है।

ऐसे ही आवारा कुत्तों को खाना देने पर जुर्माने का प्रावधान होना चाहिए। हिमाचल सरकार को चाहिए कि वो मजबूती से दृढ़ता एवं तथ्यों के साथ अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट के सामने रखे। इस मामले की तेज पैरवी करे।

हर समस्या का समाधान राजनीतिक इच्छा शक्ति में छुपा

Kill the stray dogs caught in controversy Gandhi.

हर समस्या का समाधान राजनीतिक इच्छा शक्ति में छुपा है। अब वक्त आ गया है कि राजा आवारा कुत्तों पर कृपा छोड़कर अपनी प्रजा पर दया करें।

हिमाचल में आवारा कुत्तों, शरारती बंदरों के आतंक का आखिर क्या है इलाज पागल कुत्ते को मारना तो छोटी से छोटी हिंसा है। जंगल में रहने वाला, दया का सागर कोई मुनि, पागल कुत्ते का नाश नहीं करता। उसके पास दूसरी ही रामबाण दवा होती है।

वह अपने कृपा कटाक्ष से कुत्ते का पागलपन नष्ट कर देता है। किंतु वे गृहस्थ शहरी क्या करें,जिन्हें शहर और अपने बालकों की रक्षा का धर्म सौंपा गया है। अगर मारते हैं तो पाप करते हैं, नहीं मारते हैं तो महापाप होता है।

वे पागल कुत्ते को मरवाने का अल्प पाप करके उसकी अपेक्षा बड़े पाप से बचते हैं। - महात्मा गांधी नवजीवन 10.10.1926

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