Shimla: केसीसी बैंक दो सप्ताह में करे डीपीसी, हिमाचल हाईकोर्ट ने दिए आदेश
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित (केसीसीबी) को दो सप्ताह के भीतर डीपीसी के आदेश दिए हैं। डीपीसी न होने पर बैंक के ग्रेड चार कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित (केसीसीबी) को दो सप्ताह के भीतर डीपीसी के आदेश दिए हैं। डीपीसी न होने पर बैंक के ग्रेड चार कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके बैंक के ग्रेड-चार कर्मचारियों को ग्रेड-तीन (सहायक प्रबंधक) के पदों पर पदोन्नति मिलने का रास्ता साफ हो गया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने बैंक कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया। अदालत ने बैंक प्रबंधन को दो सप्ताह के भीतर यानी 9 दिसंबर से पूर्व पात्र कर्मचारियों की डीपीसी करने का फैसला सुनाया है। केसीसी बैंक में करीब 500 कर्मचारी ग्रेड-चार के पदों पर सेवारत हैं।
इन कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए बैंक प्रबंधन की ओर से बीते 8 सितंबर 2024 को पदोन्नति परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस परीक्षा में करीब 269 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए, लेकिन ढाई माह से अधिक समय बीतने पर भी पदोन्नति के आदेश बैंक प्रबंधन की ओर से नहीं किए गए। इससे नाराज कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में अर्जी दी है। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर बैंक प्रबंधन को डीपीसी करने के आदेश दिए हैं। अब बैंक प्रबंधन को विभागीय पदोन्नति समिति का गठन कर पात्र कर्मचारियों के पदोन्नति के आदेश पारित करने पड़ेंगे। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक सीमित कर्मचारी संघ के अध्यक्ष पंकज धीमान ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद कर्मचारियों की पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
एचडीपी प्रोजेक्ट मामले में 3 दिसंबर को होगी बहस
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में उद्यान विभाग में बागवानी विकास परियोजना के तहत करीब 900 कर्मचारियों को नौकरी से हटाने के मामले में अब 3 दिसंबर को बहस होगी। तब तक अदालत के अंतरिम आदेश जारी रहेंगे। पिछली सुनवाई में न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की एकल पीठ ने विभाग से पूछा था कि जो कर्मचारी पिछले आठ साल से काम कर रहे हैं, वे अब कहां जाएंगे। इस पर उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट तलब की थी। विभाग ने अदालत को बताया था कि इन कर्मचारियों के साथ किया गया समझौता 31 अक्तूबर को खत्म हो गया है, इसलिए इन्हें पदों पर बरकरार नहीं रखा जा सकता है। इसी मामले पर 3 दिसंबर को बहस होगी ।