फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Kargil vijay diwas 2019: Shaheed Manohar Rana's name missing from school records

कारगिल विजय दिवस: स्कूल के रिकॉर्ड से गायब हो गया इस शहीद का नाम

Fri, 26 Jul 2019 11:41 AM IST
Krishan Singh राजीव पाठक, अमर उजाला, दुलैहड़ (ऊना)
राजीव पाठक, अमर उजाला, दुलैहड़ (ऊना) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 26 Jul 2019 11:41 AM IST
विज्ञापन
Kargil vijay diwas 2019: Shaheed Manohar Rana's name missing from school records
शहीद मनोहर राणा - फोटो : अमर उजाला

एक तरफ पूरा देश कारगिल विजय दिवस के शौर्य की गाथा गुनगुना रहा है, वहीं दूसरी ओर इस युद्ध में प्राण न्योछावर करने वाले शहीद मनोहर राणा का नाम सरकार ने उस स्कूल से हटा दिया जिसके प्रमाणपत्रों पर कभी शहीद का नाम छपता था।

विज्ञापन


कुठारबीत गांव से संबंध रखने वाले कारगिल शहीद मनोहर राणा के परिजनों को अब न ही शहीदी दिवस पर बुलाया जाता है, न ही अन्य कार्यक्रमों में। यहां तक कि प्रदेश सरकार या प्रशासन अभी तक इस जांबाज के नाम पर कोई गेट के रूप में स्मारक तक नहीं बना पाई है।
विज्ञापन


सरकार ने स्थानीय पाठशाला में शहीद मनोहर राणा का नाम बकायदा जोड़ा था, जो स्कूल के बाहरी गेट पर अंकित भी है। लेकिन जब से मिडिल स्कूल अपग्रेड हुआ शहीद का नाम सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्राम पंचायत प्रधान एवं शहीद मनोहर की भाभी संतोष कुमारी ने बताया कि पहले बच्चों को जो आठवीं के प्रमाण पत्र मिलते थे, उनमें शहीद मनोहर का नाम अंकित होता था, लेकिन अब स्कूल के अपग्रेड होने के बाद उनका नाम हटा दिया गया है।

हरोली विधानसभा क्षेत्र के कुठारबीत का रणबांकुरा राइफलमैन मनोहर राणा कारगिल युद्ध के दौरान 7 जुलाई 1999 को मात्र 26 साल की उम्र में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हुआ था। शहीद मनोहर को ऊना जिला के दूसरे कारगिल शहीद के नाम से भी जाना जाता है।

उनकी शहादत के बाद सरकारी घोषणा के अनुसार भाई को नौकरी मिली। पेट्रोल पंप शीघ्र ही आवंटित कर दिया गया। उनके गांव में स्थित कुठारबीत स्कूल का नाम भी शहीद मनोहर राणा के नाम पर कर दिया गया। लेकिन स्कूल के अपग्रेड होने के बाद यह नाम सरकारी रिकॉर्ड से गायब हो गया। 

मां को स्मारक न बनने का मलाल

अभी तक शहीद के नाम का कोई भी शहीदी स्मारक नहीं बन पाया। हालांकि शहीद की माता कमला देवी ने अपने खर्च पर गांव के स्कूल में एक कमरा व बरामदा और गांव पूबोवाल के स्कूल में जहां से मनोहर ने दसवीं कक्षा की परीक्षा पास की थी उसमें दो कमरे व एक बरामदा बनाया। जिसके बाद ही कुठारबीत स्कूल पर शहीद का नाम अंकित किया गया। वहीं, शहीद बेटे के नाम पर एक गेट तक नहीं बनने पर शहीद की माता कमला देवी को अभी भी इस बात का रंज है कि किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया।

निर्माण सामग्री तक उठा कर ले गए लोग
शहीद के पिता ओम प्रकाश राणा ने गांव में आने वाली सड़क पर शहीद के नाम पर गेट का निर्माण भी शुरू करवाया था, लेकिन इस दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद न ही सरकार ने और न ही प्रशासन ने इस गेट के निर्माण कार्य को शुरू करवाने में दिलचस्पी दिखाई। यहां तक कि लोग गेट निर्माण के लिए शहीद के परिजनों द्वारा लाई सामग्री को भी उठाकर ले गए। वहीं, अब सरकार की ओर से शहीद का नाम लेने वाला भी कोई नहीं है। यहां तक कि जन्मदिन और शहीदी दिवस पर भी अब कोई नहीं पूछता है। शहीद का बड़ा भाई मोहन लाल बीएसएफ में कार्यरत है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed