कराहते पहाड़: हिमाचल के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अब आपदा प्रबंधन की पढ़ाई अनिवार्य, सरकार ने लिया फैसला
प्रदेश में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों समेत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में अब आपदा प्रबंधन को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश में इंजीनियरिंग और पॉलिटेक्निक कॉलेजों समेत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में अब आपदा प्रबंधन को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाया जाएगा। यह पहल अमर उजाला के ‘कराहते पहाड़’ अभियान से प्रेरित होकर की गई है। तकनीकी शिक्षा राजेश धर्माणी ने कहा कि तकनीकी शिक्षण संस्थानों में नए शैक्षणिक सत्र से यूज आफ टेक्निक इन डिजास्टर मैनेजमेंट को अनिवार्य विषय के तौर पर शुरू करने का फैसला किया गया है। उन्होंने कहा कि आपदाओं से जूझते हिमाचल में युवाओं को तकनीक से सजग और सक्षम बनाना समय की जरूरत है। इस विषय के माध्यम से विद्यार्थियों को न केवल प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की जानकारी दी जाएगी, बल्कि यह भी सिखाया जाएगा कि आधुनिक तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स का उपयोग राहत और बचाव कार्यों में कैसे किया जा सकता है।
धर्माणी ने कहा कि राज्य में भवन निर्माण के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित स्थानों की पहचान और निर्माण तकनीकों का सही उपयोग है। इसलिए इस विषय में छात्रों को भवन निर्माण के सुरक्षित स्थानों की पहचान, स्थायित्व विश्लेषण, भूकंप-रोधी डिजाइन, जल निकासी प्रबंधन और भूमि धंसने से बचाव के उपाय जैसी व्यावहारिक शिक्षा दी जाएगी। तकनीकी शिक्षा सचिव ने इस नए पाठ्यक्रम को तैयार करने के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं। पाठ्यक्रम में एआई आधारित आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली, ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक, सेंसर नेटवर्क, और रेस्क्यू रोबोटिक सिस्टम जैसे मॉड्यूल शामिल किए जाएंगे। यह कदम न केवल युवाओं को आपदाओं के समय अधिक सक्षम बनाएगा, बल्कि आपदा प्रबंधन से जुड़े रोजगार क्षेत्रों जैसे एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर नियोजन, पर्यावरण संरक्षण और निर्माण एजेंसियों में उन्हें प्राथमिकता भी दिलाएगा।
कराहते अभियान ने खींचा सरकार और समाज का ध्यान
अमर उजाला के ‘कराहते पहाड़’ अभियान ने हिमाचल प्रदेश में आपदाओं से जुड़े खतरों, असुरक्षित निर्माण और पर्यावरणीय असंतुलन के प्रति समाज और सरकार दोनों का ध्यान खींचा था। अभियान के तहत पहाड़ी राज्यों में लगातार बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय त्रुटियों के कारण हुए नुकसान पर व्यापक चर्चा और चेतावनी दी गई थी। इसी कड़ी में अब सरकार ने तकनीकी शिक्षा को आपदा प्रबंधन के साथ जोड़ने का ठोस कदम उठाया है, ताकि भविष्य में तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवा न केवल अपने करियर में आगे बढ़ें, बल्कि प्रदेश की सुरक्षा ढाल भी बन सकें।
