कांगड़ा सीट पर भाजपा का रहा है दबदबा, कांग्रेस को नए चेहरों ने दिलाई जीत
हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद 1972 के बाद 11 लोकसभा चुनावों में छह बार भाजपा जबकि चार बार कांग्रेस को जीत मिली है। आपातकाल हटने के बाद 1977 में भारतीय लोक दल के प्रत्याशी दुर्गा चंद को भी जीत मिली थी। भाजपा की छह जीतों में चार बार शांता कुुमार और एक-एक बार डॉ. राजन सुशांत और डीडी खनौरिया सांसद रहे हैं।
कांग्रेस ने कांगड़ा संसदीय क्षेत्र पर चार बार जीत दर्ज की। हिमाचल में मिलने के बाद कांगड़ा सीट से कांग्रेस के पहले सांसद 1980 में विक्रम चंद महाजन बने। इनके बाद चंद्रेश कुमारी, सत महाजन और चंद्र कुमार भी कांगड़ा सीट से कांग्रेस के सांसद रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि कांगड़ा-चंबा संसदीय क्षेत्र में चंबा जिला की भटियात, चुराह, डलहौजी व सदर विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इसके अलावा कांगड़ा जिला से बैजनाथ, जयसिंहपुर, पालमपुर, सुलह, नगरोटा बगवां, धर्मशाला, कांगड़ा, ज्वालामुखी, शाहपुर, जवाली, नूरपुर, फतेहपुर, इंदौरा विधानसभा क्षेत्र आते हैं। पूरे संसदीय क्षेत्र में आधा क्षेत्र पहाड़ी और आधा मैदानी है। बड़ा भंगाल संसदीय क्षेत्र का सबसे दुर्गम मतदान केंद्र है।
सात चुनावों में जीत का अंतर
वर्ष भाजपा प्रत्याशी/वोट कांग्रेस प्रत्याशी/वोट
2014 शांता कुमार (4,56,163) चंद्र कुमार (2,86,091)
2009 डॉ. राजन सुशांत (3,22,254) चंद्र कुमार (3,01,475)
2004 शांता कुमार (2,96,764) चंद्र कुमार (3,14,555),
1999 शांता कुमार(3,25,066) सत महाजन (2,24,324)
1998 शांता कुमार (3,34,684) सत महाजन (2,75,449)
1996 शांता कुमार (2,26,293) सत महाजन(2,63,817)
1991 डीडी कंदौरिया (1,74,457) चंद्रेश कुमारी (1,63,641)
कब किस पार्टी से कौन बना सांसद
1977 दुर्गा चंद भारतीय लोक दल
1980 विक्रम चंद महाजन कांग्रेस
1984 चंद्रेश कुमारी कांग्रेस
1989 शांता कुमार भाजपा
1991 डीडी खनौरिया भाजपा
1996 सत महाजन कांग्रेस
1998 शांता कुुमार भाजपा
1999 शांता कुमार भाजपा
2004 चंद्र कुमार कांग्रेस
2009 डॉ. राजन सुशांत भाजपा
2014 शांता कुमार भाजपा
मुद्दों के बजाय अब आरोप-प्रत्यारोप हावी
एक वक्त था जब मुद्दों पर राजनीति होती थी और चुनाव लड़े जाते थे। उस वक्त एक-दूसरे पर निजी बयानबाजी नहीं की जाती थी। अब मुद्दों के बजाय आरोप-प्रत्यारोप ज्यादा हावी हो गए हैं। यह कहना है 94 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ओम प्रकाश चौधरी का। चौधरी कहते हैं कि उन्होंने देश के पहले लोकसभा चुनाव में मतदान किया था। वर्ष 1955 में वह शिक्षक नियुक्त हुए थे और 30 साल सेवाएं देने के बाद 1985 में सेवानिवृत्त हुए।
उनके पिता हरि राम चौधरी राजनीति में थे, लिहाजा उन्हें कभी चुनाव ड्यूटी का मौका नहीं मिला जिसका आज भी मलाल है। ओम प्रकाश ने कहा कि उन्होंने 1952 के आम चुनावों में पहली बार मतदान किया था। तब कांगड़ा पंजाब का संसदीय क्षेत्र होता था। उनके मूल घर ऊना जिला के पंजावर में हैं, लेकिन उनके पिता ने धर्मशाला में वकालत शुरू की। लिहाजा, वे धर्मशाला में रही रहने लगे।