शिकंजा कसा तो सामने आया केसीसीबी में एनपीए का खेल
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक में लाभ का आंकड़ा अधिक दिखाने के लिए नॉन परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए) को छिपाने के खेल की कलई खुल गई है। बैंक चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के बीच उपजे विवाद के बाद दो माह के भीतर बैंक का एनपीए चार फीसदी बढ़ गया है। 31 जनवरी तक 14.6 फीसदी बताया जा रहा एनपीए 31 मार्च को 18.85 फीसदी पहुंच गया।
बैंक में एनपीए को लेकर बरती गई अनियमितताओं को एक बड़ा आधार बनाते हुए ही रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी ने निदेशक मंडल को भंग कर दिया है। वर्तमान में बैंक का एनपीए 559 करोड़ से बढ़कर 720 करोड़ पहुंच गया है। दो महीनों के भीतर एनपीए का 4 फीसदी बढ़ना बैंक की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
बैंक अधिकारियों के मुताबिक उच्च अधिकारियों के दबाव के चलते कई शाखाएं एनपीए अकाउंट्स को नहीं दर्शातीं थीं। चेयरमैन और प्रबंध निदेशक के बीच विवाद बढ़ने के बाद से शाखा प्रबंधकों ने एनपीए खातों को लेकर सही स्थिति बताना शुरू की, जिसके चलते दो माह में एनपीए चार फीसदी बढ़ गया।
उधर, इस दौरान बैंक के निदेशक मंडल और ऋण कमेटी की बैठकों में भी ऋण पास करने से गुरेज किया गया। बीते दो माह के दौरान बैंक प्रबंधन ने नाममात्र के लिए ऋण देने के मामलों को मंजूरी दी। ऋण नहीं देने के चलते भी एनपीए में बढ़ोतरी हुई है।
पिछले साल दो फीसदी घट गया था एनपीए
31 मार्च, 2017 को केसीसी बैंक का एनपीए 16 फीसदी था। साल 2017 के दौरान इसे दो फीसदी घटाकर 14.6 फीसदी तक पहुंचा दिया गया। अगर यह एनपीए कम नहीं किया गया होता तो वर्तमान में एनपीए 21 फीसदी तक पहुंच जाना था।
आखिरी बीओडी में लिए गए फैसले अटके
कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के निदेशक मंडल की आखिरी बैठक में लिए गए फैसले भी लटक गए हैं। बोर्ड भंग होने से अफसरशाही बीओडी में लिए फैसलों को लेकर कोई निर्णय नहीं ले पा रही है। इन फैसलों को लागू करने के लिए अब सबकी नजरें प्रशासक नियुक्त किए उपायुक्त कांगड़ा पर टिकी हैं।
हाईकोर्ट जाने की तैयारी में जगदीश सिपहिया
निदेशक मंडल भंग किए जाने के खिलाफ बैंक के पूर्व चेयरमैन जगदीश सिपहिया हाईकोर्ट की शरण में जाने की तैयारी में हैं। सिपहिया का कहना है कि निदेशक मंडल को गलत तरीके से भंग किया गया है। कोर्ट के समक्ष इस संदर्भ में पूरी जानकारी दी जाएगी।