ज्योति हत्याकांडः विधायक चौधरी समेत 12 बरी
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बहुचर्चित ज्योति मर्डर केस में वीरवार को कोर्ट ने अंतिम फैसला दे दिया। कोर्ट ने हिमाचल में कांग्रेस विधायक रामकुमार चौधरी समेत 12 आरोपियों को रिहा कर दिया। अदालत का कहना है कि पुलिस विधायक पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर पाई है, इसलिए सभी को बरी किया जाता है।
अदालत का फैसला आने के बाद कोर्ट परिसर में काफी संख्या में विधायक चौधरी के समर्थक जमा हो गए और नारेबाजी करने लगे। कोर्ट का फैसला आने के बाद विधायक चौधरी ने कहा कि जब मैंने कोई अपराध किया ही नहीं है तो वह साबित कैसे होगा?
हालांकि इससे पहले पुलिस इस मामले में चौधरी के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा कर रही थी।
केस में आए कई उतार चढ़ाव
बहुचर्चित ज्योति हत्याकांड में सीएफएसएल चंडीगढ़ की रिपोर्ट आने से पुलिस इस केस को मजबूती मिलने का दावा कर रही थी। इस रिपोर्ट में ज्योति के कपड़ों और मौके से मिले खून के सैंपल मैच कर गए थे।
रिपोर्ट से इस केस को मजबूती तो मिली लेकिन पुलिस इसके अलावा कोई और पुख्ता सबूत नहीं जुटा पाई। स्वेटर में मिले बाल किसके थे, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई थी।
कोर्ट ने इस केस की सुनवाई के दौरान पिछले दिनों सीएफएसएल चंडीगढ़ के डायरेक्टर को नोटिस देकर सभी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल करने के आदेश दिए थे।
वारदात वाले दिन करवाई थी रजिस्ट्री
पुलिस फोन रिकार्ड के मुताबिक कोर्ट में पहले ही दस्तावेज दे चुकी है कि रामकुमार चौधरी वारदात के वक्त पंचकूला में था। असली आईडी का फोन नंबर, फर्जी आईडी का फोन नंबर व ज्योति के नंबर के अलावा अन्य आरोपियों के नंबर भी साथ-साथ पंचकूला में चल रहे थे।
प्रापर्टी डीलर जसविंद्र के अलावा बचाव पक्ष से तीन अन्य लोगों ने भी अपने बयान दर्ज कराए। जसविंद्र ने कोर्ट में कहा कि वह रामकुमार चौधरी व बग्गा के साथ नालागढ़ में किसी जमीन के सौदे के लिए गया था।
वारदात वाले दिन ही उसने नालागढ़ में जमीन की रजिस्ट्री कराई थी। इसके बाद वह खुद विधायक को बद्दी में घर पर छोड़कर आया था।
चौधरी के लिए ये बने मुसीबत
मोबाइल की लोकेशन
ज्योति, रामकुमार व अन्य आरोपियों के मोबाइल वारदात वाले दिन साथ चल रहे थे। टावर लोकेशन के डिकोडेड डाटा में भी साफ हो गया है कि चंडीगढ़ से पंचकूला तक किस-किस टावर पर कैसे-कैसे नंबर एक साथ चले। कौन किस टावर से कहां तक पहुंचा।
चंडीमंदिर टोल प्लाजा की डिटेल्स
इसमें स्पष्ट है कि वारदात वाली रात वह ट्रक पंचकूला में आया था, जिससे ज्योति का सिर कुचला गया था।
चौधरी के हस्ताक्षर
ज्योति का गर्भपात कराने के लिए मंजूरी फार्म पर साइन किए गए थे। ये साइन रामकुमार चौधरी के साइन थे, जो मैच हो चुके हैं।
ज्योति की कॉल डिटेल्स
हत्या के बाद डाटा डिलीट कर ज्योति के मोबाइल को फेंक दिया गया था। घग्गर नदी से मोबाइल रिकवर होने के बाद डाटा को रिट्राइव कराने पर पाया गया कि रामकुमार ने एक बार दो दिन में ज्योति को 40 फोन किए थे। ज्योति के मोबाइल से रामकुमार और उनकी पत्नी व एक जन्मदिन पार्टी की तस्वीरें भी रिट्राइव हो चुकी है।
एसएमएस
ज्योति के फोन से पुलिस को उसके नजदीकी दोस्त सिमी का पता चला। सिमी ने ज्योति को काफी एसएमएस कर रखे हैं। इनमें कुछ ऐसे एसएमएस हैं, जिनमें जिक्र है कि वह किसी और के लिए उसे छोड़ रही है। सिमी ने कोर्ट में बयान दिए हैं कि ज्योति ने उसे कहा था कि वह चौधरी के साथ है, जो उसकी काफी मदद करता है।