पीलिया का आतंक, गोलगप्पे मोमोज की बिक्री पर रोक
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राजधानी शिमला में पीलिया के बढ़ते मामलों के मद्देनजर उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने एपीडेमिक डिजीज एक्ट 1897 के तहत खुले में खाद्य पदार्थ बेचने पर रोक लगा दी है। पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में गोल गप्पे और मोमोज सहित सड़कों पर अन्य खाद्य पदार्थ नहीं बेचे जा सकेंगे। जिला प्रशासन ने विकासनगर स्थित वाटर एटीएम से लोगों को पानी नि:शुल्क देने का फैसला लिया है।
सोमवार को पीलिया को लेकर आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने यह घोषणा की। राजधानी शिमला में पीलिया बेकाबू होने के बाद जिला प्रशासन अब नींद से जागा है। उपायुक्त शिमला दिनेश मल्होत्रा ने बताया कि पीलिया से प्रभावित सभी क्षेत्रों में स्थित पानी की बावड़ियां सील कर दी जाएंगी।
उन्होंने इन क्षेत्रों के लोगों से नल के पानी को ही पीने का आग्रह किया। पीलिया प्रभावित क्षेत्रों में खुले बिकने वाले खाद्य पदार्थों जैसे कि गोलगप्पे इत्यादि की बिक्री पर भी पाबंदी लगा दी है। उन्होंने ढाबा मालिकों से आग्रह किया कि वह अपने ग्राहकों को उबला हुआ पानी ही उपलब्ध करवाएं। उपायुक्त ने पीलिया प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से पानी भंडारण टंकियों को साफ करने का आग्रह किया।
डीसी ने आईपीएच को पानी की आपूर्ति से पहले पानी की जांच के निर्देश दिए, साथ ही भंडारण टैंकों पर ही पानी की नियमित रूप से क्लोरिनेशन के भी आदेश दिए। बैठक में आयुक्त नगर निगम शिमला पंकज राय, उप मंडल अधिकारी शिमला ग्रामीण ज्ञान सागर नेगी, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता सुनील जस्टा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
रिपन में साढ़े पांच बजे तक चलती रही ओपीडी
जोनल अस्पताल डीडीयू (रिपन) में सोमवार को पर्ची काउंटर पर भारी भीड़ होने से मरीज परेशान रहे। पर्ची बनाने के लिए लाइनों में खड़े मरीजों को बीस मिनट से लेकर पौने घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर पर्ची बनाने के बाद डॉक्टरों ने भी शाम साढे़ पांच बजे तक ओपीडी में बैठकर मरीजों का उपचार किया। इससे मरीज खासे खुश नजर आए तथा लोगों ने डॉक्टरों की तारीफ भी की।
गौरतलब है कि पूरा शहर पीलिया की चपेट में आ गया है। इस कारण भारी संख्या में मरीज अस्पतालों में उपचार के लिए आ रहे हैं। वहीं लैबों में भी मरीजों को खड़े होने के लिए जगह नहीं मिल रही। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में पर्ची बनाने के लिए सुबह से ही भारी भीड़ अस्पताल में जुट गई थी। हालांकि दूसरी ओर मरीजों के साथ आए तीमारदारों ने तो खुद पर्ची काउंटर पर बनी लाइन में खड़े होकर पर्ची बनवाई।
उधर अस्पताल में मरीजों का उपचार कर रहे डाक्टर भी परेशान दिखे। ओपीडी में मरीजों को डॉक्टर शाम चार बजे तक देखते हैं लेकिन सोमवार को मेडिसन ओपीडी शाम साढ़े पांच बजे तक चलानी पड़ी। आंकड़ों के मुताबिक सर्दियों में ओपीडी काफी कम रहती है लेकिन पीलिया की वजह से इसमें भारी इजाफा हुआ है। उधर जुब्बड़हट्टी से पीलिया उपचार के लिए अस्पताल आई अनामिका ने बताया कि भीड़ काफी है।
इसलिए अपने तीमारदार को लाइन में लगाया है। खलीणी से उपचार के लिए पहुंचे सुरेंद्र ने कहा कि फीवर हो गया था। आधे घंटे से लाइन में हूं लेकिन अब यहां पर और खड़े रहना मुश्किल हो रहा है। दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रंजना राव ने बताया कि मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े इसलिए मेडिसन ओपीडी में बैठे डाक्टर ने ओवर टाइम किया है।
पीलिया के खिलाफ सड़क पर भाजपा
शिमला शहर में पीलिया के बढ़ते मामलों को लेकर सोमवार को भाजपा ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्तियां लेकर प्रदेश सरकार और नगर निगम के खिलाफ जमकर गुबार निकाला। सरकार और प्रशासन से मांग की गई कि आम जनता को स्वच्छ पानी मुहैया करवाए जाए। इस मौके पर स्थानीय विधायक सुरेश भारद्वाज, शिमला शहरी मंडल अध्यक्ष प्रदीप कश्यप, प्रवक्ता गणेश दत्त, संजीव सूद, राजू ठाकुर, किरन बावा सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इस मौके पर भाजपा विधायक सुरेश भरद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार और नगर निगम शिमला के लोगों को साफ पानी मुहैया करवाने में नाकाम साबित हुए हैं। इनकी नाकामी की सजा शिमला के लोग अपनी जान देकर भुगत रहे हैं। शिमला की जनता को पीलिया जैसी भयंकर बीमारी से छुटकारा मिल सके। विधायक ने नगर निगम शिमला के महापौर और उप महापौर पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह दोनों ही अपना काम ठीक ढंग से करने में नाकाम रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री पर भी आरोप लगते हुए कहा कि उन्होंने पीलिया के इलाज और टेस्ट मुफ्त करने की घोषणा की थी लेकिन वह बाद में अपनी घोषणा से मुकर गए। विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शिमला शहर में पीलिया रोग फैलने और अश्वनी खड्ड के पानी में मलमूत्र मिलने की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
आईजीएमसी और डीडीयू में एसआईटी ने की जांच
पीलिया की जांच को लेकर पुलिस महकमे की एसआईटी ने सोमवार को आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल में जाकर छानबीन की। सोमवार को पुलिस ने मेडिकल सुपरिडेंट, मेडिकल आफिसर और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के बयान लिए। इसके अलावा पीलिया का उपचार करवाने के लिए अस्पताल पहुंचने वाले 10 मरीजों के भी बयान लिए।
पुलिस की एक टीम ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा और ढली का भी निरीक्षण किया और वहां की कार्यप्रणाली की जांच की। एसआईटी तेजी से तफ्तीश कर रही है। इस मामले में नगर निगम के डिप्टी मेयर के भी बयान दर्ज किए जाने हैं लेकिन मौजूदा
समय में वह गोआ में है लिहाजा वहां से जब शिमला लौटेंगे तभी उनसे बात हो पाएगी। पुलिस ने जिन पीड़ितों के बयान दर्ज किए वह कुसुम्पटी, विकासनगर इत्यादि इलाके के रहने वाले हैं। एसपी डी डब्ल्यू नेगी ने मामले में तेजी लाने के लिए तेज तर्रार अफसरों की एक टीम बनाई है। हर पहलू पर छानबीन होगी।
पीलिया के आए कुल 63 मामले- दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में सोमवार को पीलिया के 31 नए मामले आए। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में 11 और आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला में 21 पीलिया मामले आए। राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल छोटा शिमला में सोमवार को पीलिया के 45 नए मामले सामने आए। इसमें से 21 पॉजिटिव पाए गए हैं।
यह मामले छोटा शिमला, कुसुम्पटी, परिमहल, खलीणी और मशोबरा के अलावा आसपास के क्षेत्रों से आयुर्वेदिक अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में रोजाना होने वाली ओपीडी भी डेढ़ सौ से बढ़कर दो सौ के पार हो गई है। अस्पताल आए लोगों ने बताया कि गंदा पानी पीने से उन्हें यह रोग हो रहा है।
अस्पतालों को मीडिया से बात न करने के आदेश
राजधानी शिमला में पीलिया रोग बेकाबू हो जाने के बाद स्थिति में सुधार के लिए कड़े कदम उठाने की जगह स्वास्थ्य निदेशालय ने आईजीएमसी और डीडीयू अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों को मीडिया से बात न करने के आदेश जारी किए हैं। निदेशालय की ओर से जारी आदेशों के तहत अस्पताल प्रबंधन इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया के प्रतिनिधियों से पीलिया के मामलों को लेकर कोई बात नही करेंगे।
अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई जानकारी मीडिया से साझा की तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। राजधानी शिमला से पीलिया से पीड़ित लोगों का अधिकारिक आंकड़ा 800 से पार हो चुका है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि
पीलिया के कारण लोगों को अपनी जान तक से हाथ धोना पड़ा है। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. ड एस गुरंग ने कहा कि पीलिया के बारे में किसी तरह की कोई भ्रांति न फैले और सही जानकारी मीडिया तक पहुंचे इसके लिए यह व्यवस्था की है। मीडिया से बात चीत करने के लिए एक चिकित्सक को अधिकृत कर दिया है।