मंत्रियों-विधायकों के पीएसओ को रिलीव नहीं कर सकी जयराम सरकार
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मंत्रियों और विधायकों के साथ बटालियन और जिले से लगे दर्जनों पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) के आर्डर पुरानी वाली जगह किए गए, लेकिन किसी को भी रिलीव नहीं किया। सरकार के आदेश पर महकमे ने अप्रैल में पीएसओ के आर्डर कर दिए, लेकिन प्रभावी तरीके से इन्हें लागू करने में नाकाम रहे। इनमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एक सिक्योरिटी ऑफिसर समेत कई मंत्री और विधायकों के पीएसओ शामिल हैं।
सीआईडी से वीवीआईपी की सुरक्षा में लगे पीएसओ को रिलीव कर दिया गया। वह भी मौजूदा समय में उन्हीं नेताओं की सुरक्षा में तैनात हैं। रोचक तथ्य यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार के साथ लगे पीएसओ के आर्डर कैंसल हो गए।
लेकिन मंत्रियों और विधायकों के पास सीआईडी की सुरक्षा शाखा से लगे पीएसओ अभी अधर में लटके है। इनमें कुछ पीएसओ ने मुख्यमंत्री का अप्रूव नोट भी लगाया, लेकिन सीएम के आर्डर महकमे ने लागू नहीं किए हैं। इन्हें संबंधित मंत्री या विधायक के क्षेत्र के तहत बटालियन में भेजने के आर्डर हैं।
मंत्री ने किया आग्रह
अप्रैल में एक मंत्री ने आग्रह किया कि सादी वर्दी नहीं वर्दी वाला पीएसओ चाहिए। उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रम में जाना होता है। अधिकांश पीएसओ वर्दी नहीं पहनते। मंत्री के आग्रह पर करीब 60 से ज्यादा पीएसओ को उनकी पुरानी जगह भेजने का फैसला किया गया, आर्डर भी हो गए।
सीआईडी से पीएसओ बटालियन के साथ अटैच कर दिए गए। पीएसओ को अब छुट्टी, टूअर बिल क्लेम करने के लिए बटालियन जाना होगा। इतना ही नहीं, उन्हें राजधानी भत्ते से भी महरूम रहना होगा। सीआईडी की सुरक्षा शाखा से वीआईपी की सुरक्षा में पीएसओ लगाए जाते हैं।
इन्हें वर्दी पहनना अनिवार्य नहीं होता, इतना ही नहीं कोई भी मंत्री अपनी इच्छा से किसी भी पीएसओ की मांग कर सकता है। मौजूदा समय में अधिकांश पीएसओ इन नेताओं के साथ काफी लंबे अर्से से तैनात हैं। अब देखना है कि आने वाले दिनों में जयराम सरकार अपने फैसले से पलटती है या फिर बटालियन या जिला के लिए रिलीव करके ही दम लेती है।