फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   iph contractor akshay dogra press conference in shimla.

पीलिया मामले में ठेकेदार के परिजनों का बड़ा खुलासा

Fri, 05 Feb 2016 08:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 05 Feb 2016 08:56 PM IST
विज्ञापन
iph contractor akshay dogra press conference in shimla.

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा के ठेकेदार अक्षय डोगर के परिजनों ने प्रेसवार्ता कर शहर में फैल रहे पीलिया के लिए मेयर, डिप्टी मेयर और निगम आयुक्त को जिम्मेदार ठहराया। ठेकेदार के पिता और भाई ने आईपीएच महकमे पर आरोप लगाए कि ठेकेदार की ओर से समय-समय पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की खामियों के बारे में पत्र लिखते रहे लेकिन उन्हें कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला।

विज्ञापन


अब नगर निगम अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़कर ठेकेदार को बदनाम कर रहे हैं। प्रेसवार्ता में ठेकेदार की ओर से ओसी डोगर, अजय डोगर, पूजा डोगर, अतुल कुठियाला और गोपाल डोगर मौजूद रहे। परिजनों ने दावा किया कि अक्षय डोगर के पास मल्याणा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का ठेका तीन साल के लिए 78 लाख 51 हजार पर था।
विज्ञापन


पिछले ठेकेदार के समय प्लांट में कई खामियां थीं। इस बारे में आईपीएच को बताया था। एसटीपी का काम स्लज और पानी को अलग करना था। स्लज को प्लांट के साथ खुले में रखा जाता था, उसका टेंडर दिया जाता था लेकिन स्लज नहीं उठा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कहा कि बिजली नहीं होती थी तो बिना ट्रीटमेंट के ही सीवेज छोड़ दिया जाता था, उन्हें वहां जनरेटर नहीं दिया था। प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से साल 2009 में एमसी और आईपीएच को खामियां दूर करने के आदेश दिए थे। ठेकेदार अक्षय ने 2013 में यह काम ठेके पर लिया तो उसने प्लांट में कमी को लेकर कई पत्र आईपीएच को लिखे।

कमियां ठीक न होने की हालत में ठेका कैंसल करने को भी लिखा। ठेकेदार की पेमेंट विभाग के पास रुकी थी जिसके लिए कानून के मुताबिक एक्सटेंशन लेने पड़ते हैं और वही ठेकेदार को करना पड़ा। नगर निगम को सालों से पता है कि हजारों घरों से सीवेज खुले नालों में जा रही है लेकिन नगर निगम ने आज तक कुछ नहीं किया। अब जब इनकी वजह से बीमारी फैल गई तो लोगों को नोटिस भेज रहे हैं।

ठेकेदार पानी को एसटीपी से ट्रीट कर बहती हुई खड्ड में डालता है जो छह किलोमीटर आगे जाता है उसमें भी कई नालों और घरों का सीवेज मिलता है। वहां पर आईपीएच वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट कर नगर निगम को सप्लाई करता है। आगे आईपीएच और नगर निगम की जिम्मेवारी है कि वह क्या करते हैं।


एसटीपी ट्रीटेड पानी की बायोकैमिक्ल आक्सीजन डिमांड 20 होती है जबकि पीने के पानी का बीओडी 0 होता है। इसलिए एसटीपी ट्रीटमेंट प्लांट का पानी पीने लायक नहीं होता। 31 दिसंबर को पार्षद सुरेंद्र चौहान, एमई, सीएचओ, एमसीएस, एई और आईपीएच के अधिकारियों ने प्लांट में टेस्ट किए और प्लांट को बिल्कुल ठीक चलते होने के बारे में लिखा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed