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फर्जी डिग्री वाले शिक्षकों की फिर खुली फाइल, सचिव ने बिठाई जांच

Wed, 04 Jul 2018 01:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 04 Jul 2018 01:46 PM IST
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investigation in fake degree by teachers in himachal pradesh

फर्जी डिग्रियां लेकर सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नौकरी प्राप्त करने के मामले की जांच दोबारा खुल गई है। कुछ साल पहले सरकार ने इस मामले पर जांच बिठाई थी, लेकिन जांच ठंडे बस्ते में पड़ गई थी। अब शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने नए सिरे से मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

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विभागीय सूत्रों के अनुसार फर्जी डिग्री के छह मामलों की जांच दोबारा से शुरू होने जा रही है। इन मामलों में कुछ शिक्षकों ने अपनी शैक्षणिक योग्यता अधिक दर्शाने के लिए फर्जी डिग्रियों का सहारा लिया है। इसके अलावा कुछ शिक्षकों ने जातीय दस्तावेजों में अपनी सही पहचान भी छिपाई है।
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आरोप सही पाए जाने पर इन्हें बर्खास्त किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि फर्जी डिग्रियों को दर्शाकर नौकरी प्राप्त करने वाले 17 शिक्षक सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। ऐसे शिक्षकों के खिलाफ भी अब जांच शुरू हो सकती है। आरोप साबित होने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन फंस सकती है।

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शिक्षकों की प्रतिनियुक्तियां रद्द

investigation in fake degree by teachers in himachal pradesh

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद होने पर हाईकोर्ट की फटकार के बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने सख्त फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश सरकार ने शिक्षकों की प्रतिनियुक्तियां रद्द करते हुए शिक्षकों को मूल स्कूल में लौटने के आदेश दिए हैं।

वेतन किसी स्कूल से और सेवाएं किसी दूसरे स्कूल में देने के मामले सामने आने पर शिक्षा सचिव डॉ. अरुण कुमार शर्मा ने कड़ा संज्ञान लिया है। शिक्षा सचिव ने कहा है कि शिक्षकों को उसी स्कूल में सेवाएं देनी हाेंगी, जिस स्कूल से वेतन दिया जा रहा है। दूसरे स्कूलों में प्रतिनियुक्ति पर नियुक्त शिक्षकों को अपने मूल स्कूलों में लौटना होगा।

शिक्षा विभाग के अनुसार प्रदेश में सैकड़ों ऐसे शिक्षक हैं, जो प्रतिनियुक्ति पर शहरी क्षेत्रों से सटे स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। इन शिक्षकों के इस खेल के चलते मूल स्कूल में पद रिक्त होने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रतिनियुक्ति के चलते सरकारी रिकार्ड में मूल स्कूल में पद रिक्त नहीं दर्शाया जाता है।

राजधानी शिमला में करीब 25 ऐसे शिक्षक चिह्नित हुए हैं, जिन्हें नियुक्त शहर से बाहर के स्कूलों में किया गया है, जबकि वे प्रतिनियुक्ति पर शहर में ही डटे हुए हैं। यह मामला सामने आने के बाद शिक्षा सचिव ने सभी प्रतिनियुक्तियां रद्द करने के आदेश दिए हैं।

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