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यहां रात आठ बजे हो जाते घरों में कैद, सेना है तो जलते हैं चूल्हे

Wed, 27 Mar 2019 10:29 AM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Wed, 27 Mar 2019 10:29 AM IST
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interview of kashmiri students participating in tribal festival in bilaspur himachal

हम पहली बार घाटी से बाहर आए हैं। कश्मीर बहुत खूबसूरत है, लेकिन आतंकवाद ने वहां की शांति भंग कर दी है। हमें रात आठ बजे के बाद घर से बाहर निकलने तक की आजादी नहीं। हम घरों में कैद हो जाते हैं।

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सेना की वजह से ही हमारे यहां 80 फीसदी घरों में चूल्हे जलते हैं और हम सुरक्षित हैं, वरना गोलाबारी के खौफ से लोग कब का पलायन कर जाते। पहली बार हिमाचल आए तो ऐसा लग रहा है कि यहां की खूबी शांत माहौल है।
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यहां लड़कियां जब चाहे जहां चाहें मर्जी से घूम सकती हैं। यहां हर तरह की आजादी है। हिमाचल आना हमारे लिए सुनहरा मौका है। बिलासपुर में चल रहे राष्ट्रीय जनजातीय उत्सव में आकर कश्मीर के उड़ी, बारामूला व बडगाम के युवक-युवतियां बेहद उत्साहित हैं।
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तीन ग्रुपों में पहुंचे 45 प्रतिभागियों में से 25 पहली बार कश्मीर से बाहर निकले हैं। उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र पटियाला का यह आयोजन 23 राज्यों के प्रतिभागियों को अपनी कला के प्रदर्शन के साथ यहां घुलने-मिलने और एक-दूसरे की संस्कृति जानने का मौका भी दे रहा है।

डर के मारे सोशल मीडिया में फोटो तक नहीं डाल सकती लड़कियां

interview of kashmiri students participating in tribal festival in bilaspur himachal

उड़ी और बारामूला का सांस्कृतिक दल अपनी गोजरी और पहाड़ी शैली नृत्य को प्रस्तुत कर रहा है। नई पीढ़ी गीत-संगीत से देश से जोड़कर आतंकवाद के मुंह पर तमाचा मारना चाहती है। 

टीम इंचार्ज गुलजार अहमद और सैयद आरिफ हुसैन का कहना है कि आज कश्मीर की जो लड़कियां यहां आकर अपनी संस्कृति दिखा रही हैं, उन्हें घरों से बाहर निकलने तक की इजाजत नहीं है।

शिक्षा की कमी के कारण युवा ज्यादा कार्य नहीं कर पाते हैं, लेकिन अगर रोजगार के अवसर घाटी के युवाओं को मिलें तो आतंकवाद खत्म हो जाएगा। आए दिन पाकिस्तान से होने वाली गोलाबारी से उनके लोग, और मवेशी मारे जाते हैं, जो सबसे भयावह मंजर होता है।

कश्मीर से आईं लड़कियों वाहेदा, उस्मा, पिंतलू, सजरत और स्वीटी का कहना है कि महिलाओं को बाहर जाकर घूमने नहीं दिया जाता है। डर के मारे वे सोशल मीडिया में अपनी फोटो तक नहीं लगा पातीं।

शाम आठ बजे के  बाद घरों से बाहर निकलना बंद हो जाता है। हर समय डर लगा रहता है कि पता नहीं आतंकवाद की वजह से कौन सा इलाका सुलग जाए। वह अगर हिमाचल अपनी संस्कृति की प्रस्तुति देने पहुंचीं हैं तो इसकी वजह भी भारतीय सेना ही है। 

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