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ऐतिहासिक मिजंर मेले का क्या है शाहजहां से कनेक्शन

Sun, 26 Jul 2015 08:37 PM IST
Updated Sun, 26 Jul 2015 08:37 PM IST
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International Minjar Fair in chamba Minjar Fair connection with mughal emperor shah jahan

मिर्जा परिवार के मुखिया एजाज मिर्जा की ओर से पिंक पैलेस में भगवान रघुवीर को मिंजर अर्पण के साथ रविवार को चंबा मिंजर महोत्सव का आगाज हुआ। मिर्जा परिवार की सातवीं पीढ़ी ने इस परंपरा का निर्वहन किया। मुस्लिम और हिंदू समाज की एकता के प्रतीक मिंजर मेले में निकाली शोभायात्रा की अगुवाई उपायुक्त एम सुधा देवी ने की।

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जबकि मुख्यातिथि वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने मिंजर ध्वज फहराकर एक सप्ताह तक चलने वाले इस उत्सव का आगाज किया। हालांकि, परंपरा अनुसार राज्यपाल की ओर से मेले का शुभारंभ कराया जाता है लेकिन यह तीसरा मौका है जब राज्यपाल मेले में शिरकत नहीं कर पाए। अगली स्लाइड में पढ़िए मिजंर मेले का शाहजहां कनेक्शन।

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शाहजहां ने भेंट किए थे रघुवीर के चिह्न

International Minjar Fair in chamba Minjar Fair connection with mughal emperor shah jahan

चंबा के राजा पृथ्वी सिंह को दिल्ली में शाहजहां ने खुश होकर अपने खजाने से रघुवीर के चिह्न भेंट किए थे। इसे लेकर मिर्जा परिवार चंबा आया था और यहीं रहने लगा। रघुवीर के आने की खुशी में मेला शुरू हुआ था। उस समय सोने से बनी मिंजर भेंट की गई। मिर्जा परिवार तभी से मिंजर भेंट कर मेले का शुभारंभ करता आ रहा है।

सोने की मिंजर की जगह अब रेशम की लडि़यां अर्पित की जाती हैं। चंबा में बहनों ने भाइयों को मिंजर बांध कर इस महोत्सव को रक्षा पर्व के रूप में भी मनाया। एक सप्ताह बाद मेला समाप्त होने के बाद बांधी गई मिंजर को रावी नदी में विसर्जित कर दिया जाता है।

पहले भैंसें को बहाया जाता था रावी में

International Minjar Fair in chamba Minjar Fair connection with mughal emperor shah jahan

मिंजर महोत्सव के दौरान आजादी से कई साल बाद तक भैंसें को रावी नदी में बहाया जाता था। यदि भैंसा तैर कर दूसरी तरफ निकल गया तो इसे सुख, समृद्धि के रूप में देखा जाता था। अगर भैंसा रावी में बह जाए या वापस लौट आया तो त्रासदी के रूप में देखा जाता था। अब प्रतीक रूप में नारियल को रावी में बहाया जाता है।

पाकिस्तान में भी मनाते हैं मिंजर-
आजादी के दौरान चंबा के कई परिवार पाकिस्तान में बस गए। वहां भी सावन के महीने में मिंजर महोत्सव मनाया जाता है। पाकिस्तान में भी चंबा की परंपरा को लोग आज भी जीवित रखे हुए हैं।

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