यहां होगा देवी-देवताओं का महाकुंभ, निभाई जाएगी 368 साल पुरानी परंपरा
देश-दुनिया में विख्यात अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा महोत्सव का आगाज शुक्रवार को भगवान रघुनाथ की रथ यात्रा के साथ होगा। 250 से ज्यादा देवी-देवता और हजारों लोग इस देव महाकुंभ में शिरकत करेंगे। दोपहर 3.00 बजे रथ मैदान से सभी देवी-देवता अठारह करड़ू के सौह (ढालपुर मैदान) के अस्थायी शिविरों में विराजमान होंगे। सात दिन तक यहां देव कारज में शिरकत करेंगे और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। राज्यपाल आचार्य देवव्रत भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में शिरकत करेंगे।
रघुनाथ की नगरी देवमयी हो गई है। वीरवार दोपहर तक 150 के करीब देवी-देवता कुल्लू पहुंच गए हैं। भगवान रघुनाथ के रथ को भव्य तरीके से सजाया गया है। पहली बार मनाली के जगतसुख के शिरघन नाग और सैंज से देवता वनशीरा पहुंचे हैं। शुक्रवार को रथयात्रा से पूर्व भगवान रघुनाथ के निवास स्थान रघुनाथपुर में सभी देवी-देवता शीश नवाएंगे।
इसके बाद भगवान रघुनाथ को छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ढोल-नगाड़ों की थाप पर मंदिर से कड़ी सुरक्षा के बीच भगवान रघुनाथ को रथ मैदान तक लाएंगे जहां भव्य एवं अद्भुत नजारा शुरू होगा। भगवान रघुनाथ की रथयात्रा में देशी-विदेशी सैलानी समेत शोधार्थी भी पहुंचते हैं। व्यापारिक मेले का शुभारंभ राज्यपाल आचार्य देवव्रत करेंगे। दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त कुल्लू यूनुस ने बताया कि दशहरा के लिए सभी तैयारियों को पूरा कर दिया है।
368 साल पहले शुरू हुआ था कुल्लू दशहरा
वर्ष 1650 में अयोध्या से भगवान रघुनाथ की मूर्ति लाई गई। तत्कालीन राजा जगत सिंह ने अपना राजपाठ भगवान रघुनाथ को सौंपकर छड़ीबरदार के रूप में उनकी सेवा करने का संकल्प लिया। तब से ढालपुर मैदान में दशहरा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
आज भी जगत सिंह के वंशज देव परंपराओं का निर्वहन कर रहे हैं। घाटी के 365 देवी-देवताओं को दशहरे का न्योता दिया जाता है। रथ यात्रा में भगवान रघुनाथ के दायीं ओर चलने को लेकर देवता शृंगा ऋृषि और बालू नाग का विवाद आज तक जारी है।
इस बार भी नहीं होगी पशु बलि
कुल्लू दशहरा उत्सव में इस पर भी पशु बलि नहीं होगी। एसपी शालिनी अग्निहोत्री ने बताया कि सार्वजनिक रूप से पशु बलि पर प्रतिबंध है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सशर्त दशहरा उत्सव में पशु बलि की राहत दी थी, लेकिन शर्तें पूरी न होने के कारण इस बार भी बलि नहीं होगी।