एंटी चाइल्ड लेबर डे: छह साल में 21 हजार निरीक्षण, छुड़ाए गए महज 31 बाल श्रमिक
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देश भर की तरह प्रदेश में भी जहां तहां बाल श्रम होता नजर आता है, लेकिन श्रम विभाग का अमला यह नहीं देख पा रहा है। पिछले छह साल के सरकारी आंकड़ों में विभाग की हैरतअंगेज करामात ऐसा ही कुछ दर्शा रही है।
विभाग की मानें तो इन छह सालों के दौरान विभागीय टीमों ने 21 हजार से ज्यादा औचक निरीक्षण किए हैं, लेकिन उन्हें केवल 31 बच्चे ही बाल श्रम करते मिले, जिन्हें छुड़ा लिया गया। विभाग के इन अजब दावों से कहना मुश्किल है कि प्रदेश कभी बाल श्रम मुक्त हो भी पाएगा।
दरअसल, प्रदेश के श्रम विभाग ने वर्ष 2012 से लेकर 2017 तक के जो आंकड़े दर्ज किए हैं, उनमें विभाग की अथक मेहनत तो नजर आती है, लेकिन बाल श्रम लगभग नगण्य है।
छह वर्ष की रिपोर्ट बताती है कि विभाग ने इस दौरान कुल 21 हजार 472 निरीक्षण किए। इस लिहाज से विभागीय टीमों ने रोजाना करीब 10 मर्तबा औचक निरीक्षण कर बाल श्रम पर नकेल कसने की कोशिश की, लेकिन सफलता के नाम पर इन छह सालों में विभाग 31 बच्चों को बाल श्रम से छुड़ाने में कामयाब हो पाया।
अभियोग चलाने से लेकर आर्थिक दंड के अधिकार
कार्रवाई के नाम पर विभाग के पास अभियोग चलाने से लेकर आर्थिक दंड के अधिकार भी हैं। उधर, विभाग के पास बाल श्रम पर रोक न लग पाने के अपने तर्क हैं।
नाम न लिखने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाल श्रम करते बच्चों को विभाग छुड़ा तो लेता है, लेकिन उनके पुनर्वास को ठोस नीति नहीं है। विभाग की ओर से ऐसे बच्चों को परिवार को सौंपा जाता है या फिर बाल कल्याण आयोग के सुपुर्द किया जाता है।
कई बार छुड़ाए गए बच्चे फिर से बाल श्रम की कुरीति का हिस्सा बन जाते हैं। अधिकारी ने दावा किया कि 21 हजार से ज्यादा निरीक्षण में किसी प्रकार की कोताही नहीं बरती गई।
छह वर्ष के दौरान 31 बच्चों को छुड़ाने के अलावा 41 मामलों में बाल श्रम के आरोप पर अभियोजन चलाया गया। 31 मामलों में लोगों को सजा भी हुई। यही नहीं, 3.37 लाख रुपये उल्लंघन करने वालों से बतौर जुर्माना वसूला गया।
विशेष फंड से पुनर्वास की योजना
बाल श्रम से छुड़ाए गए बच्चों के पुनर्वास को विभाग एक विशेष फंड का प्रावधान करने जा रहा है। इस फंड से जुटने वाली राशि का इस्तेमाल बच्चों के पुनर्वास पर होगा।
एक अधिकारी ने कहा कि ज्यादातर मामलों में गरीब परिवार के बच्चे ही काम में लगे होते हैं जो अपनी या परिवार की इच्छा से काम में लगे होते हैं। उन्होंने बताया कि फंड के जरिये बच्चों को आर्थिक मदद देने का प्रयास होगा
ताकि बालिग होने तक उन्हें बाल श्रम न करना पड़े। हालांकि जब तक ऐसा फंड तैयार नहीं होता, तब तक बच्चों को बाल श्रम से बचाया तो जा सकता है लेकिन उन्हें या उनके परिवारों को रोकना मुश्किल है।