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Shimla News: इंश्योरेंस कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश

Wed, 23 Jul 2025 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 23 Jul 2025 11:59 PM IST
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Insurance company ordered to pay compensation of Rs 30 lakh
एक्सक्लूसिव
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हेड कांस्टेबल की गिरने से हुई थी मौत, कंपनी ने शराब पीकर गिरने का तर्क देकर खारिज कर दिया था दावा
आयोग ने सेप्टिक शॉक पाया मौत का कारण
कंपनी को 35 हजार रुपये कोर्ट खर्च के भी देने होंगे
दीपक मेहता
शिमला। हिमाचल पुलिस के हेड कांस्टेबल रूप चंद की गिरने से हुई मौत के बाद बीमा क्लेम न देने पर उपभोक्ता फोरम ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को 30 लाख रुपये मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।


बीमा कंपनी ने घटना के समय शराब के अधिक सेवन का कारण बताकर रूप चंद की पत्नी बिमला देवी (वादी) के दावे को खारिज कर दिया था। लेकिन आयोग ने पाया कि रूप चंद की मृत्यु का कारण सेप्टिकमिक शॉक था जो उन्हें गिरने के दौरान लगी चोटों के कारण हुआ था। अब उपभोक्ता फोरम ने वादी के दावे को स्वीकार करते हुए कंपनी को 30 लाख रुपये देने के आदेश दिए हैं। साथ ही 35 हजार रुपये मानसिक तनाव और कोर्ट खर्च के भी देने होंगे। शिमला शहर के टूटीकंडी निवासी रूप चंद पुलिस मुख्यालय महानिदेशक के कार्यालय में बतौर हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। इनके पास पुलिस वेतन पैकेज (पीएसपी) कवर था। इसमें मृतक रूप चंद सहित पुलिस कर्मियों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा कवर 30 लाख का शामिल था।
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मृतक रूप चंद का वेतन खाता भी भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में था। दलील दी कि वर्ष 2020 में वह पीएसपी और पीएआई के तहत शामिल हुए थे। 29 जून 2020 को रूप चंद बाथरूम में अचानक गिर गए थे। इस बीच उन्हें उपचार के लिए आईजीएमसी शिमला रेफर लाया गया लेकिन 21 जुलाई को उपचार के दौरान रूप चंद का निधन हो गया। दलील दी कि यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी (बीमा कंपनी) के पास 4 जनवरी 2020 से 3 जनवरी 2021 तक पीएआई बीमा (व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा) कवर था। रूप चंद की मृत्यु के बाद, परिजनों ने पीएआई बीमा कवर का लाभ प्राप्त करने के लिए एसबीआई को सूचित किया।
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शिकायतकर्ताओं ने व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा दावे से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी की और बीमा कंपनी को उनके दावे के निपटान के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज प्रदान किए। लेकिन कंपनी ने वास्तविक दावे को अस्वीकार कर दिया। तर्क दिया है कि पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार घटना/दुर्घटना के समय शराब या नशीली दवाओं के प्रभाव में बीमित व्यक्ति की मृत्यु, चोट या विकलांगता के संबंध में मुआवजे के भुगतान के लिए कंपनी उत्तरदायी नहीं होगी। मृतक शराब का आदी था। इसके बाद 20 जनवरी 2023 को उपभोक्ता फोरम में मृत्यु दावे के उचित मुआवजे को लेकर याचिका दाखिल की थी। आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य कैलाश चंद की पीठ ने शिकायतकर्ता बिमला देवी के हक में फैसला सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को 45 दिन के भीतर याचिका दायर करने की तारीख से प्रति वर्ष नौ फीसदी ब्याज के साथ दावेदार को भुगतान करने का आदेश दिया है। संवाद





यह होता है सेप्टिकमिक शॉक
सेप्टिकमिक शॉक को सेप्टिक शॉक के रूप में भी जाना जाता है। यह एक जीवन-धमकाने वाली स्थिति है और तब होती है जब कोई संक्रमण गंभीर रूप से पूरे शरीर में सूजन प्रतिक्रिया को ट्रिगर (प्रतिक्रिया) करता है, जिससे खतरनाक रूप से निम्न रक्तचाप और अंग क्षति होती है। यह सेप्सिस (जानलेवा स्थिति) का सबसे गंभीर रूप है, जो संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया के कारण पैदा होने वाला सिंड्रोम है।
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