सेब बागवानों ने बीमा करवा लिया, पैसे देने की बारी आई तो खड़े कर लिए हाथ
कंपनियां प्रत्येक कर्जधारक बागवान के खाते से हजारों रुपये फसल बीमा के नाम से कटवा रही हैं। खाते से जब पैसा कट जाता है तो बैंक से मालूम करने पर ये फसल बीमा का प्रीमियम कटा है।
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सेब बागवानों ने बीमा तो करवा लिया, मगर जब पैसे देने की बारी आई तो हाथ खडे़ कर दिए। हिमाचल प्रदेश में किसानों के कर्ज के खातों पर बैंकों और बीमा कंपनियों का गड़बड़झाला चल रहा है। उनके कर्ज के खातों से प्रीमियम काटकर कहां जा रहा है, यह किसान-बागवान नहीं जानते हैं। कंपनियां प्रत्येक कर्जधारक बागवान के खाते से हजारों रुपये फसल बीमा के नाम से कटवा रही हैं। खाते से जब पैसा कट जाता है तो बैंक से मालूम करने पर ये फसल बीमा का प्रीमियम कटा है। जब दावे किए जाते हैं तो कंपनियां कह रही हैं कि ओलावृष्टि इसमें कवर नहीं है, इसके लिए टॉप अप लिया जाए। टॉप अप कब लें, यह बागवानों की समझ से परे है। हिमाचल प्रदेश में हाल ही में भारी बर्फबारी और ओलावृष्टि से सेब और अन्य फसलों को भारी नुकसान हुआ है। मगर बैंकों और बीमा कंपनियों की ओर से बताया जा रहा है कि ओलावृष्टि इसमें कवर नहीं है। इस मुद्दे को सेब सीजन से पहले स्वर्गीय बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा भी उठा चुके थे, लेकिन बागवानों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। सेब बागवानों ने तो इस संबंध में सीबीआई जांच तक की मांग की थी।
दवाओं पर सब्सिडी की योजना बदलने से भी खफा हैं बागवान
हाल में सरकार ने बागवानी विस्तार केंद्रों के माध्यम से स्प्रे की दवाइयों की बिक्री रोकने और खुले बाजार में सीमित दवाइयां देने का निर्णय लिया है। अब बागवानों को उद्यान विभाग सस्ती सब्सिडीयुक्त दवाएं देने के बजाय एक हेक्टेयर तक फसल के लिए एक साल में अधिकतम आठ हजार रुपये तक दवाएं खरीद कर ही उपदान देने का दावा कर रहा है। दवाओं के अधिकतम चार हजार रुपये उनके खाते में लौटा देने की बात की। इससे कम दवा खरीद पर पचास फीसदी उपदान मिलेगा, जबकि कई ब्लॉकों में एंटी हेलनेट की सब्सिडी भी कई साल से नहीं दी गई है। इससे भी सेब बागवान खफा है कि दवा सब्सिडी के मामले में भी आवेदन लंबित हैं। पहले इस तरह का झंझट नहीं था। वहीं, बागवानी विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि यह व्यवस्था केंद्र से ही हुई है। इस बारे में देहांत से पहले पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने तो सीएम जयराम ठाकुर को चिट्ठी तक लिखी थी।