नहीं खानी पड़ेंगी गोलियां, एक इंजेक्शन से 3 माह रुकेगी प्रेगनेंसी
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परिवार नियोजन के लिए कापर टी, कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों के प्रयोग का तरीका पुराना होने वाला है। भारत सरकार जल्द ही प्रेगनेंसी से बचाने वाले गर्भ निरोधक इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में शुरू करने जा रही है। इस इंजेक्शन से तीन माह तक प्रेगनेंसी रोकने का दावा किया गया है।
केंद्र सरकार ने महिलाओं को पुराने परिवार नियोजन के तरीकों से छुटकारा दिलाने के लिए इंजेक्शन को भारत में सरकारी स्तर पर लगाने की तैयारी पूरी कर ली है। संसद के बजट सत्र के बाद इंजेक्शन को सरकारी अस्पतालों में लांच किया जाएगा।
इंजेक्शन की कितनी कीमत होगी, इस पर मंथन जारी है। पांच और छह अप्रैल को इस इंजेक्शन को लेकर केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई है। इसमें इंजेक्शन को लांच करने की तारीख तय हो सकती है। हिमाचल से भी स्वास्थ्य महकमे के अफसर इस बैठक में शामिल होने जाएंगे।
पड़ोसी देशों में 1970 से गर्भ निरोधक इंजेक्शन
भारत के पड़ोसी देशों में साल 1970 में पहली बार महिलाओं को गर्भ निरोधक इंजेक्शन उपलब्ध करवाए गए। अध्ययन बताते हैं कि इंजेक्शन सबसे पसंदीदा गर्भ निरोधकों में से है।
गर्भनिरोधक इंजेक्शन के इस्तेमाल का अनुपात भूटान में 44 प्रतिशत, बांग्लादेश में 22 प्रतिशत, नेपाल में 21 प्रतिशत और इंडोनेशिया में 55 प्रतिशत है। भारत में इस इंजेक्शन को अभी सामाजिक संगठनों के जरिये ही उपलब्ध करवाया जा रहा है।
नसबंदी पर ही सभी राज्य दे रहे जोर
परिवार नियोजन के स्थायी उपाय के लिए हिमाचल प्रदेश समेत सभी राज्यों में नसबंदी पर ही सरकारें सबसे अधिक काम कर रही हैं। इसमें भी महिलाओं की नलबंदी करने की संख्या अधिक है। हिमाचल में अभी तक करीब ढाई लाख पुरुषों ने नसबंदी करवाई है, जबकि महिलाओं की संख्या साढ़े सात लाख से अधिक है।
इंजेक्शन के फायदे और नुकसान
इंजेक्शन गर्भधारण रोकने के अलावा गर्भाश्य के कैंसर की संभावना को भी खत्म कर देता है। खून की कमी और सिकल सैल एनीमिया से ग्रस्त महिलाओं के सैल घटने के संकट को कम कर सकता है।
अनियमित रक्तस्राव को कम करने और पेट दर्द को कम करने के लिए भी इंजेक्शन फायदेमंद बताया जा रहा है। कुछ प्रयोगकर्ताओं ने इंजेक्शन के इस्तेमाल से वजन में वृद्धि, सिरदर्द, चक्कर आना, पेट फूलना, बेचैनी, मनोभावों में बदलाव, सेक्स की इच्छा में कमी और हड्डियां कमजोर होने की बात कही है।