नई तकनीक इजाद- हड्डी टूटने पर न प्लास्टर होगा, न प्लेट डलेगी
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अगर हादसे में हाथ-पैर की कोई हड्डी टूट जाती है तो अब महीना भर प्लास्टर चढ़ाने या प्लेट्स डालने की जरूरत नहीं होगी। भारत और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने संयुक्त शोध कर एक ऐसा बायो मैटीरियल तैयार किया है जो जल्द ही टूटी हड्डी को जोड़ देगा।
प्लास्टर या प्लेट्स की तरह इस बायो मैटीरियल को ऑपरेशन से निकालने की जरूरत नहीं है। हड्डी जोड़ने के बाद यह मैटीरियल अपने आप ही शरीर में खत्म हो जाएगा।
प्लेट्स के मुकाबले मरीज को दर्द से जल्द छुटकारा दिलाने वाले इस बायो मैटीरियल की खास बात है कि यह सस्ता भी होगा। इस पर अंतिम शोध चल रहा है।
अमेरिका में टेस्टिंग के बाद मिलेगी मंजूरी
अमेरिका की लैब में टेस्टिंग के बाद हेल्थ एसोसिएशन यूएसए की अंतिम मंजूरी के बाद इसे मार्केट में उतारा जाएगा। प्रोजेक्ट का नाम ज्वाइंट फॉर जनरेटिंग टिश्यू इंजीनियर आर्गन एंड कंट्रोलिंग सैल बिहेवियर है।
प्रोजेक्ट के सदस्य हिमाचल के मंडी जिला के भरौरी निवासी एवं पीयू चंडीगढ़ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विजय कुमार शर्मा ने बताया कि उनकी टीम की ओर से बनाया बायो मैटीरियल आर्थो जगत के लिए वरदान से कम नहीं होगा।
रीढ़ की हड्डी टूटने वालों के लिए भी यह मददगार साबित होगा। इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र सरकार ने लाखों रुपये का फंड जारी किया है।
डॉ. विजय और उनकी पत्नी टीम में शामिल
मंडी जिला के धर्मपुर उपमंडल के भरौरी निवासी डा. विजय कुमार शर्मा, उनकी पत्नी डॉ. क्षमा शर्मा, आईआईटी कानपुर के डॉ. राजू कुमार गुप्ता, डॉ. कार्तिकेय वर्मा और अमेरिका के युवा वैज्ञानिक प्रो. अली खदमोसेसीनी इस प्रोजेक्ट पर शोध कर रहे हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में कार्यरत यूएस के डॉ. अखिलेश भी इस प्रोजेक्ट में सहयोगी हैं। डॉ. विजय विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक और प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं।
वे अनुसंधान और नवाचार के अंतर्गत वैज्ञानिक समीक्षा समिति के सदस्य नामित किए गए हैं। डॉ. विजय जनवरी 2016 से पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में सहायक प्राध्यापक के पद पर कार्यरत हैं।