हिमाचल में चीन सीमा से 15 किमी तक सटे गांव सील, लाहौल में मंडराते दिखे लड़ाकू विमान
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हिमाचल में चीन से लगती करीब 250 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास के पंद्रह किलोमीटर के इलाकों को सील कर दिया गया है। कोरिक जैसे इलाकों की तरफ फिलहाल आम लोगों को किसी भी सूरत में न जाने के लिए कह दिया गया है। उधर, लोगों का कहना है कि देर रात 11 बजे उन्होंने कुल्लू और लाहौल के आसमान में लड़ाकू विमानों को मंडराते हुए देखा। लोगों ने सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो डाले।
उल्लेखनीय है कि आधिकारिक रूप से भले ही पुलिस के अधिकारी कुछ बोलने से बच रहे हैं लेकिन सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर आम लोगों की मूवमेंट न करने के लिए कहा गया है। सीमा से सटे इलाकों में सेना के जवानों व गाड़ियों की मूवमेंट भी बढ़ गई है।
सूत्रों की मानें तो दोनों ही जिलों में लगती इस लंबी सीमा पर तो आईटीबीपी और सेना ने मोर्चा संभाल लिया है। लेकिन इसके बाद सिविल इलाकों में आर्मी इंटेलिजेंस, आईबी और स्थानीय इंटेलिजेंस यूनिटों को अलर्ट कर दिया गया है। उधर, चीन के साथ हिंसक झड़प में बीस सैनिकों की शहादत के बाद लोगों में भी खासी नाराजगी देखने को मिली है।
एक ओर जहां लोगों ने सोशल मीडिया पर हमले को लेकर चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की मांग की है, वहीं दूसरी ओर एक बार फिर से चीनी उत्पादों के बहिष्कार को लेकर भी सोशल मीडिया पर अपील का दौर शुरू हो गया है। सीमा से सटे गांवों में लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है।
किन्नौर और लाहौल में सुरक्षा एजेंसियां भी अलर्ट पर
भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प के बीच हिमाचल के किन्नौर और लाहौल स्पीति में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। पुलिस मुख्यालय की ओर से दोनों जिलों के पुलिस अधीक्षकों को अतिरिक्त सावधानी व एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं। मुख्यालय के प्रवक्ता डॉ. खुशहाल शर्मा ने बताया कि दोनों जिलों में आबादी वाले सीमांत क्षेत्रों में खास निगरानी के आदेश दिए गए हैं। साथ ही खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क रहने और हर छोटी सूचना से मुख्यालय को अवगत कराने के लिए कहा गया है। उल्?लेखनीय है कि हाल ही में जिसके बाद कुछ दिन पहले पश्चिमी कमान के आर्मी कमांडर ने समदो बॉर्डर का दौरा कर सेना के जवानों से मुलाकात कर उनका मनोबल बढ़ाया था। यही नहीं, मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का भी दौरा प्रस्तावित था लेकिन किन्हीं कारणों से वह टल गया। फिलहाल आईबी व आर्मी इंटेलिजेंस जैसी केंद्रीय एजेंसियों ने भी इस इलाके में अपनी नजरें गड़ा दी हैं। बॉर्डर पर आईटीबीपी और सेना ने मोर्चा संभाल रखा है।
मनाली के रास्ते लद्दाख भेजी गईं जम्मू-कश्मीर की 50 बसें...
खास बात यह है कि आम तौर पर जम्मू से सीधे लेह लद्दाख के लिए बसों को रवाना किया जाता था। लेकिन ताजा हालात और कानवाय को सुरक्षित उन इलाकों तक पहुंचाने के लिए हिमाचल के मनाली से होकर जाने वाले लंबे रास्ते को इन मजदूरों को पहुंचाने के लिए चुना गया। सूत्रों का कहना है कि पहले सिर्फ सेना ही इस रास्ते का इस्तेमाल करती थी।
लेकिन तनाव के बीच सुरक्षित विकल्प के तौर पर इस रास्ते को अन्य लोगों को भी पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भी बताया गया है कि इसी रास्ते से ही बसें वापस आएंगी और आगे भी कुछ समय तक इस रूट का ही प्रयोग किया जाएगा।