धोखाधड़ी पर पंचायत सचिव और पूर्व प्रधान को दो साल कैद
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विशेष न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने उपमंडल बड़सर की बड़ग्रां पंचायत के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव को धोखाधड़ी के मामले में दो साल का कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
जुर्माना अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। इसके साथ ही पीसी एक्ट की धारा 13(2) में दो साल का साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी।
पंचायत के पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव पर आरोप थे कि उन्होंने पंचायत में सरकारी रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर दो लोगों को गलत प्रमाण पत्र देकर सामाजिक सुरक्षा पेंशन (बुढ़ापा पेंशन) उपलब्ध करवाई है।
इस मामले की शिकायत बड़ाग्रां पंचायत के संजय कुमार ने डीएसपी विजिलेंस, तहसील कल्याण और जिला कल्याण अधिकारी के कार्यालय में की थी। विजिलेंस ने जांच में पाया कि पंचायत के तत्कालीन प्रधान और पंचायत सचिव ने पंचायत के एक व्यक्ति को फर्जी जन्म प्रमाण पत्र उपलब्ध करवाया।
दस्तावेजों के मुताबिक व्यक्ति की जन्म तिथि 25 जनवरी 1955 थी, जबकि पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड कर सर्टिफिकेट में 1944 दर्शाई थी।
इसके साथ ही एक अन्य महिला को बुढ़ापा पेंशन मुहैया करवाने के लिए पंचायत की ओर से प्रमाण पत्र जारी किया गया। इस मामले में हमीरपुर न्यायालय में 25 गवाह पेश हुए। अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश राकेश कैंथला ने पूर्व प्रधान और पंचायत सचिव को दोषी पाया।
जिला न्यायवादी चंद्रशेखर भाटिया ने अदालत के आदेश की जानकारी देते हुए बताया कि अदालत ने दो-दो साल के कठोर कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई है।