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Shimla News: संजौली कॉलेज में बताया औषधीय पौधों का महत्व
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पौधों की पहचान करना भी सिखाया
संजौली कॉलेज की प्राचार्या डॉ. भारती भागड़ा ने किया शुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली महाविद्यालय में वीरवार को डीबीटी स्टार कॉलेज योजना के तहत विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की जानकारी दी गई।
इसका संचालन डाॅ. दीप्ति गुप्ता, डॉ. सुशील शर्मा और डॉ. शिखा चंदेल ने किया। इसमें शिमला और इसके आसपास पैदा होने वाले विभिन्न प्रजाति के पौधों के औषधीय गुणों के बारे में बताया। कार्यशाला में राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी), सेंट बीड्स कॉलेज और कोटशेरा कॉलेज के छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला का शुभारंभ संजौली कॉलेज की प्राचार्या डॉ. भारती भागड़ा ने किया। इसमें अतिथियों को औषधीय पौधे भेंट किए गए। वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. सुशील शर्मा ने स्वदेशी औषधीय पौधों का महत्व बताया।
प्रदर्शनी में चोरा, चिरायता, चोखरी, नागछत्री, और सर्पगंधा, वनककड़ी पौधे प्रदर्शित किए गए। मलेरिया के उपचार में इस्तेमाल होने वाले छमरा पौधे की जानकारी भी दी। संजौली कॉलेज में आयोजित प्रदर्शनी में आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले पाषाण भेद, जंगली अजवायन और महा मेधा पौधे को भी प्रदर्शित किया। इन्हें च्यवनप्राश का प्रमुख घटक माना जाता है। कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता भी शिरकत की।
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संजौली कॉलेज की प्राचार्या डॉ. भारती भागड़ा ने किया शुभारंभ
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली महाविद्यालय में वीरवार को डीबीटी स्टार कॉलेज योजना के तहत विद्यार्थियों को औषधीय पौधों की जानकारी दी गई।
इसका संचालन डाॅ. दीप्ति गुप्ता, डॉ. सुशील शर्मा और डॉ. शिखा चंदेल ने किया। इसमें शिमला और इसके आसपास पैदा होने वाले विभिन्न प्रजाति के पौधों के औषधीय गुणों के बारे में बताया। कार्यशाला में राजकीय कन्या महाविद्यालय (आरकेएमवी), सेंट बीड्स कॉलेज और कोटशेरा कॉलेज के छात्र-छात्राओं तथा शिक्षकों ने भाग लिया। कार्यशाला का शुभारंभ संजौली कॉलेज की प्राचार्या डॉ. भारती भागड़ा ने किया। इसमें अतिथियों को औषधीय पौधे भेंट किए गए। वनस्पति विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. सुशील शर्मा ने स्वदेशी औषधीय पौधों का महत्व बताया।
प्रदर्शनी में चोरा, चिरायता, चोखरी, नागछत्री, और सर्पगंधा, वनककड़ी पौधे प्रदर्शित किए गए। मलेरिया के उपचार में इस्तेमाल होने वाले छमरा पौधे की जानकारी भी दी। संजौली कॉलेज में आयोजित प्रदर्शनी में आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले पाषाण भेद, जंगली अजवायन और महा मेधा पौधे को भी प्रदर्शित किया। इन्हें च्यवनप्राश का प्रमुख घटक माना जाता है। कार्यक्रम में वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रमुख डॉ. दीप्ति गुप्ता भी शिरकत की।
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