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अवैध निर्माण से कंकरीट के जंगल बने शहर, सरकारें हैं इसकी जिम्मेदार

Sat, 05 May 2018 12:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sat, 05 May 2018 12:58 PM IST
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Illegal constructions across Himachal Pradesh in Shimla Manali Kullu and Solan

अवैध निर्माण के चलते हिमाचल के लगभग सभी शहरी क्षेत्र कंकरीट के जंगल में बदलते जा रहे हैं। प्रदेश के 54 शहरी क्षेत्रों में ऐसा कोई कस्बा नहीं है, जहां अवैध निर्माण न हुआ हो। इसके लिए सरकारें-अफसरशाही भी जिम्मेदार है। धरातल पर अवैध निर्माण को रोकने के लिए व्यवस्था बनाने के बजाय नेता अवैध भवनों को नियमित करने  के सपने दिखाते रहे।

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सरकारी रिकार्ड में ही शहरी क्षेत्रों में तीस हजार से ज्यादा अवैध निर्माण हैं। अवैध निर्माण को नियमित करने के लिए सरकारें छह बार रिटेंशन पॉलिसी ला चुकी हैं लेकिन कोर्ट इसे कई बार खारिज कर चुका है। कसौली गोलीकांड के बाद सुप्रीमकोर्ट ने अवैध निर्माण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनजीटी से भी अवैध निर्माण को लेकर कई फैसलेे आ चुके हैं।
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प्रदेश में दो हजार से अधिक होटल कारोबारियों ने ही अवैध निर्माण किया है। सोलन के अलावा शिमला, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा जिले में अवैध निर्माण कर बनाए होटलों की संख्या अधिक है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की लापरवाही से अवैध निर्माण बढ़ा है।
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उधर, न्यायालय की सख्ती के बाद सरकार अब समाधान तलाशने में जुटी है। एनजीटी में सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की है। अवैध निर्माण को सील करने की राहत देने के फैसले में भी कानूनी पेच फंस गया है। यह मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

कुल्लू-मनाली में 1700 होटल अवैध

Illegal constructions across Himachal Pradesh in Shimla Manali Kullu and Solan

एनजीटी ने कुल्लू-मनाली के करीब 1700 होटलों तथा हाईकोर्ट ने मणिकर्ण के कसोल में होटलों, रेस्तरां व होमस्टे का निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं। कसोल में करीब 35 होटल और रेस्तरां सील किए हैं। कुल्लू से मनाली तक एनजीटी के आदेश पर जांच की जा रही है।

पर्यटन विभाग ने करीब 150, प्रदूषण बोर्ड ने 100 तथा टीसीपी ने करीब दो दर्जन होटलों को नोटिस भेजे हैं। अभी तक एनजीटी और हाईकोर्ट ने किसी भी होटल और रेस्तरां को तोड़ने के आदेश नहीं दिए हैं। 

धर्मशाला में 155 होटलों, रेस्तरां अवैध- धर्मशाला के मैक्लोडगंज, भागसुनाग, धर्मकोट व नड्डी सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग 275 होटल, गेस्ट हाउस हैं। हाईकोर्ट ने इनमें 155 होटलों को अवैध करार देते हुए बिजली-पानी के कनेक्शन काटे हैं। 155 में से 15 होटलों ने अपनी शर्तें पूरी कर ली थीं। इसके बाद अस्थाई रूप से बिजली-पानी बहाल किया था।

शिमला में भी भारी अनियमितताएं

Illegal constructions across Himachal Pradesh in Shimla Manali Kullu and Solan

राजधानी शिमला में निजी होटलों के निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर इसी साल नगर निगम, पर्यटन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होटलों की जांच की थी। एक महीने चले निरीक्षण में 18 होटल ऐसे पकड़े गए, जिन्होंने तय नक्शे से अधिक निर्माण कर रखा था।

नोटिस जारी कर इनके बिजली-पानी के कनेक्शन काटे गए हैं। इनमें पर्यटन निगम का भी एक होटल है। हालांकि, इनमें अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। 

डलहौजी में बढ़ा अवैध निर्माण- डलहौजी में चल रहे तीन दर्जन अनधिकृत होटलों और रेस्टोरेंट पर भी जल्द प्रशासन का डंडा चलेगा। जिलाधीश चंबा ने इस बारे में जिला पर्यटन अधिकारी को आदेश जारी किए हैं। जांच पूरी होने पर संबंधित क्षेत्र के एसडीएम के माध्यम से अनधिकृत होटल और रेस्तरां सील किए जा सकते हैं।

अब कुल्लू-मनाली के होटलों की बारी

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कसौली में अवैध निर्माण हटाने के बाद अब पर्यटन नगरी कुल्लू-मनाली की बारी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के फैसले के बाद सरकार ने संयुक्त कमेटी गठित की है। कमेटी ने दोनों पर्यटन स्थलों में 40 ऐसे होटल, रेस्तरां और होम स्टे चिह्नित किए हैं, जिन्होंने अवैध निर्माण किया है। 11 मई से पहले सरकार इसकी सूची एनजीटी में जमा कराएगी।

इसी तारीख को होटल मालिकों के अवैध निर्माण के मामले में फैसला आना संभावित है। कुल्लू-मनाली में 1785 होटल हैं। संयुक्त निरीक्षण टीम ने पहले चरण में अतिक्रमण करने वाले 40 होटल मालिकों की सूची बनाई है। इसके बाद टीम दूसरी लिस्ट तैयार करेगी। बताया जा रहा है कि पर्यटन नगरी में अतिक्रमणकारियों की सूची सैकड़ों में जा सकती है।

इधर, कसौली में हुए गोलीकांड के बाद सरकार सकते में है। अवैध निर्माण हटाने के लिए सरकार के सामने एक तरफ कुंआ तो दूसरी ओर खाई है। संयुक्त टीम के अध्यक्ष एवं एडीएम कुल्लू अक्षय सूद ने बताया कि 40 अतिक्रमणकारियों की सूची तैयार की गई है। 11 मई से पहले सूची को एनजीटी में जमा कराया जाना है। इसके बाद जो आदेश होगा, कार्रवाई की जाएगी।

783 होटल, रेस्तरां पंजीकृत हैं पर्यटन विभाग में

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पर्यटन विभाग के पास कुल्लू-मनाली में 783 होटल, रेस्तरां और होम स्टे पंजीकृत हैं। मौके पर देखा जाए तो इनकी संख्या इससे दोगुनी है। निरीक्षण टीम इसकी रिपोर्ट तैयार कर रही है। 

काटे जा चुके हैं बिजली-पानी के कनेक्शन- एनजीटी के फैसले के बाद कुल्लू-मनाली में कई होटल मालिकों के बिजली-पानी के कनेक्शन काटे जा चुके हैं। अगर एनजीटी की ओर से अतिक्रमण हटाने के आदेश आते हैं तो यहां अवैध निर्माण हटाना प्रशासन के लिए चुनौती से कम नहीं होगा। 

प्रतिदिन 5000 रुपये जुर्माना देगी सरकार- कुल्लू-मनाली में अवैध निर्माण को लेकर एनजीटी में 20 अप्रैल को मामले की सुनवाई हुई थी। इस दिन सरकार को खूब फटकार लगी थी। एक लाख रुपये जुर्माने के साथ 28 मई से प्रतिदिन 5000 रुपये जुर्माना लगाया गया। अब सरकार 11 मई से पहले अतिक्रमणकारियों की सूची एनजीटी में जमा कराने जा रही है।

पहले से एनजीटी में चल रहा मामला- कुल्लू मनाली में होटलों, रेस्तरां, होम स्टे में अतिक्रमण को लेकर पहले से ही मामला एनजीटी में चल रहा है। हालांकि, अब सरकार ने कैबिनेट बैठक में फैसला लिया है कि जिन लोगों के नक्शे पास हैं, अगर उन्होंने अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया है, सरकार उसे सील करेगी। अन्य मंजिलों में बिजली-पानी जैसी मूलभूत सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

पिछली सरकारों में हुए हैं अवैध निर्माण, शैलबाला की हत्या के लिए वो भी दोषी

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पूर्व मुख्यमंत्री एवं सांसद शांता कुमार ने कहा कि हिमाचल में अवैध निर्माण पिछली सरकारों के कार्यकाल में हुए हैं। शैलबाला की हत्या की दोषी भी पिछली सरकारें हैं। उन्होंने अवैध कब्जों पर प्रदेश सरकार को सुप्रीमकोर्ट की फटकार को अपमानजनक बताया है। कहा कि उच्चतम न्यायालय का यह कहना कि पूरे प्रदेश में अवैध कब्जे हुए हैं, यह और भी चिंताजनक है। 

शांता ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को कई सुझाव भी दिए हैं। अवैध निर्माण पर सख्त कानून बनाकर देश में उदाहरण पेश किया जा सकता है। कहीं पर सरकारी संपत्ति पर कोई अवैध कब्जा होता है तो अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

यही नहीं, अवैध कब्जा करना भी अपराध घोषित किया जाए। इसमें अवैध कब्जा गिराना ही काफी नहीं है, बल्कि छह माह की सजा का प्रावधान भी होना चाहिए। प्रदेश में पुराने सभी गैरकानूनी कब्जों पर भी इस कानून को लागू करने की घोषणा की जाए। 

ईमान भी बिकता रहा और इंसान भी- सांसद शांता कुमार ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की उस घोषणा को प्रशंसा के काबिल बताया है जिसमें उन्होंने जल्द अवैध कब्जे हटाकर कोर्ट के आदेशों को सख्ती से लागू करने की बात कही है।

सांसद ने कहा कि प्रदेश में कुछ प्रभावशाली लोग सरकारी अधिकारियों को खरीदकर सरकारी भूमि पर कब्जा करते हैं। लिहाजा, इसमें ईमान भी बिकता रहा और इंसान भी बिकते रहे। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोट की खातिर सभी राजनीतिक दल अवैध कब्जा करने वाले प्रभावशाली लोगों का समर्थन करते हैं।

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