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IIT और अमेरिका के इंजीनियरों ने इजाद की ऐसी तकनीक, अब नहीं होंगे हादसे

Sat, 28 Apr 2018 02:53 PM IST
कमलेश रतन भारद्वाज, अमर उजाला, मंडी
कमलेश रतन भारद्वाज, अमर उजाला, मंडी Updated Sat, 28 Apr 2018 02:53 PM IST
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IIT Mandi and USA engineers equipment drowsy driving to stop road accidents

वाहन चलाते समय चालक को अगर झपकी आ जाए तो उसे सायरन जगा देगा। हादसों को रोकने के लिए आईआईटी मंडी के प्रशिक्षु इंजीनियरों ने अमेरिका के डब्ल्यूपीआई इंजीनियरिंग संस्थान के सहयोग से एक उपकरण तैयार किया है। यह उपकरण चालक को झपकी आने के 10 सेकेंड के भीतर सायरन बजाकर अलर्ट कर देगा।

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इस उपकरण की कीमत महज 5 हजार रुपये है। डेढ़ माह की मेहनत के बाद प्रशिक्षु इंजीनियरों ने इसे उपकरण को तैयार किया है। प्रशिक्षुओं ने इस उपकरण को ड्राउजी ड्राइविंग नाम दिया है। इसमें नाइट विजन कैमरा लगा होगा। चालक की आंखें जैसे ही बंद होंगी, उपकरण में लगी रैसबेरी ओपन कंप्यूटर विजन तकनीक (आई डिटेक्शन) आंखों की हरकत को कैद कर लेगी और सायरन झपकी लगते ही सजग कर देगा।
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इस सिस्टम से गाड़ी में नीली रोशनी भी होगी, जो चालक को नींद नहीं आने देगी। यह उपकरण चालक को गाड़ी के डैश बोर्ड पर आंखों के ठीक सामने रखना होगा। रैसबेरी पीआई ओपन कंप्यूटर विजन हाथ के साइज का एक छोटा कंप्यूटर है, जिसमें कैमरे से ली गई तस्वीर और वीडियो को एनालाइज करने की क्षमता है।

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ड्राऊजी ड्राइविंग को मिला प्रथम पुरस्कार

IIT Mandi and USA engineers equipment drowsy driving to stop road accidents

आईआईटी में इंटररैक्टिव सोशियो टेक्निकल प्रैक्टीकम (आईएसटीपी) में ड्राऊजी ड्राइविंग उपकरण को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है। द्वितीय पुरस्कार ई वेस्ट उपकरण बनाने वाली टीम को मिला है। इसके अलावा स्माटर सिटी प्रोजेक्ट को पॉपलुर प्रोजेक्ट खिताब मिला है। विजेताओ को निदेशक टिमोथी ए गोंजाव्ल्सि ने पुरस्कृत किया है। 

सात प्रशिक्षुओं ने तैयार किया उपकरण- इस उपकरण को तैयार करने में आईआईटी मंडी के विभिन्न विभागों के सात प्रशिक्षुओं ने कड़ी मेहनत की है। उत्कृष्ट धनखड़, अर्चित, रूशील, पंकज और यूएसए के पॉलिटेक्निकल संस्थान के निको, ग्लेन, पालमर ने इस उपकरण को तैयार किया है।

वहीं आईआईटी के प्रोफेसर वरुण दत्त और यूएसए के प्रोफेसर डा. इंग्रिड सौकी, सेथ्र टयूलर ने प्रशिक्षुओं का मार्गदर्शन किया है।  

उपकरण को और बेहतर बनाने के प्रयास- आईआईटी मंडी के निदेशक टिमोथी ए गोंजाल्विस ने कहा कि अमेरिका और आईआईटी मंडी के प्रशिक्षु इंजीनियरों ने यह उपकरण तैयार किया है। इस उपकरण का जल्द पेटेंट करवाया जाएगा। उपकरण को और बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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