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हिमाचल हाईकोर्ट: पति कुछ नहीं कमाता हो, स्वस्थ है तो पत्नी और बच्चे का भरण-पोषण करना उसका कर्तव्य
Fri, 11 Sep 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 11 Sep 2026 05:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक मुकदमों में भरण-पोषण को लेकर स्पष्ट किया है कि एक पति या पिता जो वर्तमान में कुछ न कमा रहा हो लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो अपनी पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी और भरण-पोषण करने के कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पारिवारिक मुकदमों में भरण-पोषण को लेकर स्पष्ट किया है कि एक पति या पिता जो वर्तमान में कुछ न कमा रहा हो लेकिन शारीरिक और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ है, तो अपनी पत्नी और बच्चे की जिम्मेदारी और भरण-पोषण करने के कर्तव्य से पीछे नहीं हट सकता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने पति की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। पत्नी और उसके नाबालिग बेटे ने सरकाघाट की फैमिली कोर्ट में भरण-पोषण के लिए अर्जी दाखिल की थी।
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कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए पत्नी को 2,500 रुपये प्रति माह और बच्चे के लिए 3,500 प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश सुनाया। पति ने हाईकोर्ट में दलील दी थी कि उसकी कुल मासिक आय महज 6,100 है। इसके अलावा उसने फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद जारी प्रमाणपत्रों के आधार पर दावा किया कि उसका नाबालिग बेटा उसी के साथ रह रहा है। इसलिए निचली अदालत का आदेश कानूनन सही नहीं है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब किसी न्यायिक आदेश को चुनौती दी जाती है, तो उसकी वैधता निचली अदालत के सामने मौजूद सामग्री के आधार पर ही परखी जाती है। जो प्रमाणपत्र फैमिली कोर्ट का फैसला आने के बाद बनवाए गए, वे केवल अपने फायदे के लिए तैयार किए गए प्रतीत होते हैं। कोर्ट ने माना कि आज के समय में पत्नी के लिए 2,500 और बढ़ते बच्चे के लिए 3,500 की राशि बिल्कुल भी अत्यधिक नहीं है कि इसमें कोई दखल दिया जाए।
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