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HP Panchayat Election: ससुर का सरकारी भूमि पर कब्जा तो बहू नहीं लड़ सकेगी पंचायत चुनाव, जानें सरकार का तर्क

Thu, 07 May 2026 09:44 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Thu, 07 May 2026 09:44 AM IST
सार

हिमाचल प्रदेश में अगर किसी मुखिया विशेषकर ससुर का सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है तो उसकी बहू अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएगी। सरकार का तर्क है कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था। इससे अवैध कब्जों पर अंकुश लगेगा। पढ़ें पूरी खबर...

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If a Father-in-Law Encroaches on Government Land the Daughter-in-Law Cannot Contest Panchayat Elections HP
हिमाचल पंचायत चुनाव 2026। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में अगर किसी परिवार के मुखिया विशेषकर ससुर का सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा है तो उसकी बहू अब पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएगी। सरकार ने इस संबंध में एक ऑर्डिनेंस पारित किया है, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है। चुनाव के लिए नामांकन शुरू होने से ठीक पहले सरकार की ओर से लाए गए ऑर्डिनेंस का असर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहीं कई संभावित महिला प्रत्याशियों पर पड़ेगा।

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अब तक के प्रावधानों के अनुसार यदि परिवार के मुखिया ने सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया होता था तो भी उस परिवार की बहुएं चुनाव लड़ सकती थीं, जबकि बेटा, बेटी (जिसकी शादी न हुई हो) दादा-दादी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। अब संशोधन के बाद बहुओं को दी गई छूट भी समाप्त कर दी गई है। सरकार का तर्क है कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के लिए यह कदम जरूरी था। इससे अवैध कब्जों पर अंकुश लगेगा। सूत्र बताते हैं कि मंगलवार शाम ऑर्डिनेंस का सर्कुलर जारी कर इस पर मंत्रियों की सहमति ली गई, इसके बाद इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया। बताया जा रहा है कि राजभवन के कर्मचारी फाइल लेकर सुंदरनगर पहुंचे और यहां ऑर्डिनेंस पर राज्यपाल के हस्ताक्षर कराए गए।

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आशा वर्कर अब पंचायत चुनाव लड़ सकेंगी हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश पर लगाई रोक
हिमाचल प्रदेश में अब आशा वर्कर भी पंचायत चुनाव लड़ सकेंगी। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसके तहत आशा कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 2 मई 2026 के फैसले के क्रियान्वयन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने यह आदेश रीना देवी व अन्य मामले की सुनवाई के दौरान पारित किया। इस स्थगन आदेश के बाद अब आशा कार्यकर्ता पंचायत चुनावों में उम्मीदवार के तौर पर नामांकन भर सकेंगी और चुनाव लड़ सकेंगी। 

अदालत ने राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 जून को निर्धारित की गई है। अदालत को बताया गया कि सरकार ने 2 मई को जारी अधिसूचना के तहत आशा कार्यकर्ताओं को अंशकालिक कर्मचारी (पार्ट टाइम वर्कर) मानकर उन्हें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 122(1)(जी) के तहत चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहरा दिया था। याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए तर्क दिया कि सरकार का यह कदम उनके सांविधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
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