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जीपीएफ घपले पर एचआरटीसी ने दी सफाई, सरकार से मांगा पैसा
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:08 AM IST
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निगम प्रबंधन ने प्रदेश सरकार से अतिरिक्त राशि जारी करने का आग्रह किया है ताकि पैसे को जीपीएफ ट्रस्ट में जमा कराया जा सके।
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प्रदेश पथ परिवहन निगम की माली हालत के चलते कर्मचारियों का पैसा जीपीएफ में जमा नहीं कराया जा सका। निगम प्रबंधन ने कहा है कि प्रदेश सरकार से अतिरिक्त राशि जारी करने का आग्रह किया है। ताकि पैसे को जीपीएफ ट्रस्ट में जमा कराया जा सके।
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निगम प्रबंधक ने स्पष्ट किया कि निगम कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि के रूप में 5.50 करोड़ रुपये प्रतिमाह कटौती की जा रही है। अप्रैल, 2008 से नियमित रुप से भविष्य निधि में मासिक कटौती जमा करवा रहा है।
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लेकिन अंतरिम राहत 5 फीसदी जोकि माह नवंबर 2006 से देय हुआ था। महंगाई भत्ते का देय एरियर जनवरी माह 2009 से आज तक जोकि 98 करोड़ और ब्याज 44.60 करोड़ रुपये बनता है। निगम की वित्तीय स्थिति के चलते इसे कर्मचारियों की भविष्य निधि में जमा नहीं कराया जा सका।
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निगम ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में 68.50 करोड़ की भविष्य निधि में कर्मचारियों से कटौती करके जमा करवाई और 74.18 करोड़ रुपये भविष्य निधि से बतौर अग्रिम धनराशि वितरित की और 11.13 करोड़ रुपये सेवानिवृत्त कर्मचारियों व मृत कर्मचारियों के आश्रितों को बतौर अंतिम भुगतान किया गया। इसके अलावा 133 करोड़ रुपये उच्च ब्याज दरों पर बैंकों में एफडीआर के रुप में निवेश किया हुआ है।