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ओवरलोडिंग रोकने का निकाला तोड़, दफ्तरों से फील्ड में उतारे जाएंगे चालक-परिचालक

Fri, 28 Jun 2019 01:16 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 28 Jun 2019 01:16 PM IST
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hrtc conductors and drivers duty in filed soon
सांकेतिक तस्वीर

कुल्लू के बंजार में बस हादसे के बाद बिना व्यवस्था ओवरलोडिंग पर प्रतिबंध से जगह-जगह लोगों की नाराजगी झेल रही सरकार ने इसका तोड़ निकाल लिया है। सचिवालय में परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने विभाग के निदेशक जेएम पठानिया, एमडी संदीप भटनागर सहित अन्य अधिकारियों से बैठक कर फैसला लिया है कि ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाने के लिए निगम 90 बसें चलाएगा। सालों से खड़ी जेएनएनयूआरएम की बसों को सड़कों पर उतारा जाएगा और जुगाड़ लगाकर सालों से एचआरटीसी के दफ्तरों में बैठे चालक-परिचालकों को इनमें चढ़ाया जाएगा। 

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इन चालकों को बसों में स्टेयरिंग जबकि परिचालकों के हाथ में थैले थमाए जाएंगे। रोटेशन में इनकी सेवाएं ली जाएंगी। यह इसलिए ताकि कार्यालय का काम भी प्रभावित न हो। हालांकि, प्रदेश सरकार ने कार्यालय में लिपिक, बुकिंग क्लर्क और अन्य पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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जब तक ये पद नहीं भरे जाते, तब तक कार्य रोटेशन से चलता रहेगा। दिव्यांग कर्मचारी और महिला कर्मचारी पहले की तरह दफ्तर में ही सेवाएं देते रहेंगे। बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि परिवहन निगम में रिक्त पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग या प्रदेश विश्वविद्यालय के माध्यम से लिखित परीक्षा कराई जाएगी। वर्ष 2003-04 में हुए घोटाले से सबक लेते हुए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।

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200 चालक-परिचालक डटे हैं दफ्तरों में

एचआरटीसी की बसों को चलाने का जिम्मा अनुबंध आधार पर तैनात चालक-परिचालक व नए कर्मचारियों पर है। जिन कर्मचारियों की नौकरी 20 व इससे अधिक साल की हो गई है, वे जुगाड़ लगातार दफ्तरों में बैठे हैं। इनकी संख्या दो सौ के करीब है। जो फील्ड में सेवाएं नहीं देगा, सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

छोटे रूटों पर दौड़ेंगी छोटी बसें
शहरी क्षेत्रों में एचआरटीसी की बड़ी बसें नहीं दौड़ेंगी। इन रूटों पर निगम छोटी बसें चलाएगा। यह इसलिए ताकि जाम न लग सके। 

व्यावसायिक वाहन चलाने के लिए होगी लिखित और मौखिक परीक्षा
हिमाचल में व्यावसायिक वाहन चलाने के लिए अब लिखित और प्रैक्टीकल परीक्षा देनी पड़ेगी। हिमाचल में 266 ड्राइविंग स्कूल हैं, जहां लोग ड्राइविंग सीखते हैं। सरकार की ओर से यह व्यवस्था की जा रही है कि स्कूल मालिकों के पास अब अपना भवन होना चाहिए।

प्रैक्टीकल के लिए 7 से 8 गाड़ियां, क्लास रूम, जिनमें सीसीटीवी कैमरे लगे हों आदि की व्यवस्था होना अनिवार्य किया जा रहा है। बड़ी बात यह है कि यह परीक्षा न तो परिवहन विभाग लेगा और न ही ड्राइविंग स्कूल का मालिक। थर्ड पार्टी अभ्यर्थियों की लिखित और प्रैक्टीकल परीक्षा लेगी। 

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