गजब एचपीयू, अब फिर एक नया कारनामा
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आए दिन सुर्खियों में रहना तो एचपीयू कर आदत बन गई है। लेकिन इस बार जो कारनामा यूनिवर्सिटी ने किया है उसे जानकर आप हैरान रह जाएंगे। एचपीयू ने इक्डोल के हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा दिया है। 27 नवंबर से परीक्षा है, लेकिन छात्रों को स्टडी मैटीरियल (किताबें) अब तक नहीं मिला। रूसा ने यहां भी रुला दिया है।
प्रथम और तृतीय सत्र की परीक्षाएं 27 से शुरू होनी हैं। इक्डोल के जरिये भारी भरकम फीस देकर छात्रों ने आवेदन किए हैं। ये परीक्षा से संबंधित स्टडी मैटीरियल का इंतजार कर रहे हैं। चिंता सताने लगी है कि कब मैटीरियल आएगा, कब पढ़ाई होगी। इक्डोल से रूसा सीबीसीएस (च्वायस बेस क्रेडिट सिस्टम) में यूजी डिग्री करने वाले छात्र परेशान हैं।
पल्ला झाड़ने के लिए एचपीयू का रटा-रटाया जवाब मिल रहा है कि यूजी ब्रांच में कर्मचारियों की कमी है। यहां सवाल है कि छात्र क्या करें। कर्मचारियों की कमी का खामियाजा वो क्यों भुगते। अव्यवस्था की वजह स्टडी मैटीरियल का देरी से छप कर आना, यूजी ब्रांच में मुट्ठी भर कर्मचारियों पर छह हजार से अधिक छात्रों का काम सौंपा जाना है।
एक अनुबंध पर लगाया गया चतुर्थ श्रेणी कर्मी ही स्टोर से स्टडी मैटीरियल छांटने और पैक करने का काम कर रहा है। शाखा में तैनात दो वरिष्ठ सहायक, एक सहायक, एक अधीक्षक और अनुभाग अधिकारी ही किताबों की गिनती से लेकर उसे छात्रों के दिए एड्रेस पर डिस्पेच करने का काम कर रहे हैं। रोज कोर्स से संबंधित पूछताछ को सैकड़ों छात्रों को भी यही कर्मी निपटा रहे हैं, इन्हें बाई हेंड स्टडी मैटीरियल भी दे रहे हैं।
किस कोर्स में कितने हैं छात्र
इस यूजी ब्रांच से यूजी ईयर सिस्टम के तहत फाइनल ईयर के करीब 2200, रूसा तृतीय सत्र के करीब 2500 और प्रथम सत्र के तीन हजार के करीब छात्रों ने प्रवेश फार्म भरे हैं।
स्टोर में भरा है लाखों का स्टडी मैटीरियल
शाखा और उसके स्टोर में हजारों के हिसाब से छात्रों के लिए छपवाई गई लाखों की किताबों के ढेर लगे हुए हैं। स्टाफ कम है, ऐसे में इनका आवंटन नहीं हो पा रहा है।
कंप्यूटर ऑपरेटर नहीं मिल रहा है
इक्डोल यूजी कोर्स की ब्रांच में ऑनलाइन हर जानकारी उपलब्ध करवाना संभव ही नहीं है, अभी तक ऑपरेटर न मिलने के कारण डाटा एंट्री का काम शुरू ही नहीं हो पाया है।
निदेशक खुद कर रहे हैं स्टडी मैटीरियल डिस्पेच
शाखा में स्टाफ की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निदेशक खुद स्टडी मैटीरियल लिफाफों में भर रहे हैं और इसे डिस्पेच कर रहे हैं।
इक्डोल निदेशक प्रो. रमेश चंद कौंडल ने माना कि स्टाफ की कमी के कारण हजारों छात्रों का काम समय से निपटाना संभव नहीं है। ऑनलाइन सिस्टम में डाटा एंट्री को ऑपरेटर की मांग कई मर्तबा एचपीयू से की गई, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
वे स्वयं भी स्टडी मैटीरियल डिस्पेच करने का कार्य कर चुके हैं।